विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफ़ग़ान लोगों को दिया मदद का आश्वाशन

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफ़ग़ान लोगों को दिया मदद का आश्वाशन

नई दिल्ली | भारत, अफ़ग़ानिस्तान और उसकी अवाम का हमेश से ही समर्थक रहा है। लेकिन तालिबान के कब्ज़े के बाद भारत के हाथ बध गए हैं और वो बारीकी से स्थिति पर नज़र बनाये हुए है। लेकिन अब तालिबान के कब्ज़े के लगभग एक महीने बाद अफगानिस्तान को लेकर भारत ने अपना रुख साफ़ कर दिया है।भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर (External Affairs Minister Dr. S. Jaishankar) ने कहा है कि देश, अफगानिस्तान के साथ अपनी दोस्ती नहीं तोड़ेगा।   

विदेश मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान में गंभीर हालात के सामने, भारत अतीत की तरह ही अफगान लोगों के साथ खड़ा होने  के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, की अफ़ग़ान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और भारत को उसकी मदद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक साथ आना चाहिए ताकि एक सक्षम वातावरण तैयार किया जा सके।

अफगानिस्तान में मानवीय स्थिति 2021 (Humanitarian Situation in Afghanistan 2021) पर संयुक्त राष्ट्र की उच्च स्तरीय बैठक (United Nations High-Level Meeting) में अपनी टिप्पणी में, डॉ जयशंकर ने कहा, वर्तमान स्थिति में जो चुनौतियां हैं, उनमें सबसे ऊपर लोजिस्टिक्स है। उन्होंने कहा, इसलिए, यह आवश्यक है कि मानवीय सहायता प्रदाताओं को अफगानिस्तान तक निर्बाध, अप्रतिबंधित और सीधी पहुंच प्रदान की जाए। 

एक बार जब राहत सामग्री उस देश में पहुंच जाएगी, तो दुनिया स्वाभाविक रूप से अफगान समाज के सभी वर्गों में मानवीय सहायता के गैर-भेदभावपूर्ण वितरण की अपेक्षा करेगी। उन्होंने कहा, केवल संयुक्त राष्ट्र में ही ऐसे प्रयासों की निगरानी करने और दानदाताओं को आश्वस्त करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, भारत ने अफगानिस्तान के भविष्य पर संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका का लगातार समर्थन किया है और वैश्विक सहमति बनाने और संयुक्त कार्रवाई को प्रोत्साहित करने में एक बहुपक्षीय मंच हमेशा छोटे समूहों की तुलना में अधिक प्रभावी होता है। 

उन्होंने कहा, भारत का मानना ​​है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2593 को आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करना चाहिए क्योंकि अफगानिस्तान एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम ने हाल ही में आकलन किया है कि उस देश में गरीबी का स्तर 72 से बढ़कर 97 होने का आसन्न खतरा है। 

न केवल गरीबी के खिलाफ हमारी सामूहिक लड़ाई में बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी इसके विनाशकारी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा, जैसा कि हम इसे संबोधित करते हैं, यह महत्वपूर्ण है कि यात्रा और सुरक्षित मार्ग का मुद्दा जो मानवीय सहायता के लिए एक बाधा के रूप में उभर सकता है, को तुरंत सुलझाया जाए। उन्होंने कहा, जो लोग अफगानिस्तान में और बाहर यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें बिना किसी रुकावट के ऐसी सुविधाएं दी जानी चाहिए।

अपनी टिप्पणी में, विदेश मंत्री ने उल्लेख किया कि भारत के प्रयासों और अफगान लोगों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से मदद करने की वजह से वहां लोगों को आजीविका और एक समकक्ष विकास के अवसरों में योगदान दिया है। उन्होंने कहा, हमारी दोस्ती भारतीय विकास परियोजनाओं में परिलक्षित होती है जो आज सभी 34 प्रांतों में मौजूद हैं। 

डॉ जयशंकर ने कहा, भारत ने अफगानिस्तान के लोगों के कल्याण के लिए तीन अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है। भारत ने बिजली, जलापूर्ति, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, कृषि और क्षमता निर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 500 परियोजनाएं शुरू की हैं।

एस जयशंकर ने कहा कि भारत, अफगानिस्तान के करीबी पड़ोसी के रूप में वहां के घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहा है। 

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