कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश

कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश

• सतत नियोजित प्रयासों से प्रदेश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर पर प्रभावी नियंत्रण बना हुआ है। उत्तर प्रदेश में हर दिन ढाई लाख से तीन लाख टेस्ट हो रहे हैं, जबकि पॉजिटिविटी दर न्यूनतम है। अब तक 06 करोड़ 28 लाख 58 हजार से अधिक कोविड सैम्पल की जांच की जा चुकी है 

जनपद श्रावस्ती, संतकबीर नगर, महोबा, ललितपुर, हाथरस, अलीगढ़ में अब कोविड का एक भी मरीज शेष नहीं है। यह जनपद आज कोविड संक्रमण से मुक्त हैं। 41 जिलों में संक्रमण का एक भी नया कैस नहीं पाया गया, जबकि 33 जनपदों में इकाई अंक में मरीज पाए गए। वर्तमान में प्रदेश में एक्टिव कोविड केस की संख्या 1,044 है, जबकि 944 लोग घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इस स्थिति को और बेहतर करने के लिए ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट की नीति के अनुरुप सभी जरूरी प्रबंध किए जाएं।

• ट्रैसिंग, टेस्टिंग और त्वरित ट्रीटमेंट के मंत्र से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। विगत 24 घंटे में 02 लाख 36 हजार 544 कोविड सैम्पल की जांच की गई और 70 नए मरीजों की पुष्टि हुई, जबकि 155 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। इस अवधि में पॉजिटिविटी दर 0.03% रही। प्रदेश में कोरोना की रिकवरी दर 98.6% है। अब तक 16 लाख 84 हजार 123 से अधिक प्रदेशवासी कोरोना संक्रमण से मुक्त होकर स्वस्थ हो चुके हैं। राज्य सरकार सभी 75 जिलों में न्यूनतम एक-एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए संकल्पित है। 

आदरणीय प्रधानमंत्री जी द्वारा इसी माह देवरिया, एटा, फतेहपुर, हरदोई, प्रतापगढ़, सिद्धार्थ नगर, गाजीपुर, मीरजापुर और जौनपुर जनपद में नवस्थापित मेडिकल कॉलेजों के प्रथम चरण को लोकार्पित किया जाना प्रस्तावित है। इस संबंध में सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूरी कर ली जाएं।

• कोविड की तीसरी लहर की आशंका देखते हुए सभी जरूरी कार्य यथाशीघ्र पूरे किए जाएं। मेडिकल कॉलेजों/स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में चिकित्सकीय उपकरणों की कमी कतई न रहे। बाइपैक मशीन, पीडियाट्रिक आईसीयू, मोबाइल एक्सरे मशीन सहित सभी जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को विधिवत प्रशिक्षित किया जाए। पीडियाट्रिक विशेषज्ञ हो, नर्सिंग स्टाफ हो अथवा तकनीशियनों की जरूरत, जिलावार स्थिति का आकलन करते हुए पर्याप्त मानव संसाधन की व्यवस्था कराएं।


• कोरोना काल में कतिपय जनपदों में कुछ निजी कोविड अस्पतालों द्वारा मरीजों के परिजनों के आर्थिक शोषण की शिकायतें मिली हैं। इन अस्पतालों ने सरकार द्वारा तय दर से अधिक की वसूली की। 

आपदाकाल में मरीजों और परिजनों का शोषण निंदनीय है, यह मानवता के विरुद्ध है। ऐसी कई शिकायतों पर कार्रवाइयां हुईं हैं। हर एक शिकायत का संज्ञान लेते की जाए और दोषी पाए जाने पर अस्पताल के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए।

• सभी जिलाधिकारी/पुलिस कप्तान माह में एक दिन व्यापार मंडल/उद्योग प्रतिनिधियों के साथ संवाद करें। इसके लिए दिवस तय कर लिया जाए। उनकी समस्याओं/जरूरतों का मेरिट के आधार पर त्वरित समाधान किया जाए। 

इसी प्रकार, सभी विभाग प्रत्येक सप्ताह में एक दिन सांयकाल एक घंटे विभागीय कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए सुनिश्चित करें। शिकायतों के समाधान के लिए त्वरित प्रयास हो।

• जन समस्याओं/शिकायतों/अपेक्षाओं के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक माह के प्रथम और तृतीय शनिवार को "तहसील दिवस" तथा द्वितीय और चतुर्थ शनिवार को " थाना दिवस" का आयोजन किया जा रहा है। तहसील दिवस व थाना दिवस में प्राप्त होने वाले आवेदन पत्रों का निराकरण प्रत्येक दशा में अगले 05 दिवस के भीतर करा दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि तहसील दिवस में हुई शिकायत अगले थाना दिवस में पुनः प्रस्तुत न हो। जनता की संतुष्टि ही अधिकारियों की कुशलता का मानक होगा।जनमहत्व के इन कार्यक्रमों के लिए जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान सीधी मॉनीटरिंग करेंगे। आईजीआरएस के प्रकरणों का प्राथमिकता के साथ निस्तारण किया जाए।

• वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित सहायता के लिए संचालित हेल्पलाइन नम्बर 14567 सेवा को और बेहतर किये जाने की जरूरत है। वरिष्ठ नागरिकों से सतत संवाद बनाये रखा जाए। कैंसर की समस्या से ग्रस्त अथवा डायलिसिस कराने वाले मरीजों के इलाज में कतई देरी न हो। प्रदेश में कोविड टीकाकरण का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है। जुलाई माह में अब तक उत्तर प्रदेश में 98 लाख से अधिक वैक्सीन डोज दी जा चुकी है।

प्रदेश में 04 करोड़ 10 लाख 56 हजार से अधिक कोविड वैक्सीन लगाए जा चुके हैं। 3 करोड़ 53 लाख 97 हजार लोगों ने कम से कम कोविड की एक खुराक ले ली है। यह किसी एक राज्य द्वारा किया गया सर्वाधिक वैक्सीनेशन है। कोविड वैक्सीनेशन को और तेज करने की तेज करने की आवश्यकता है।

• राज्य सरकार के अधीन किसी भी विभाग में कार्यरत किसी कार्मिक की मृत्यु यदि कोविड संक्रमण से हुई हो तो विभाग द्वारा संबंधित परिवार के प्रति पूरी संवेदनशीलता और सहानुभूतिपूर्वक यथोचित सहयोग किया जाए। अनुग्रह राशि का भुगतान हो या मृतक आश्रित सेवायोजन अथवा अन्य कोई प्रकरण, कोई फाइल लंबित न रहे।




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