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डीजे की तेज ध्वनि से सेहत पर क्या पड़ता है असर

डीजे की तेज ध्वनि से सेहत पर क्या पड़ता है असर

आज कल हर शुभ अवसर पर लोगों के यहां डीजे जरूर बजाय जाता हैं। चाहे वो विवाह समारोह, सेवानिवृत्ति, जन्मदिवस या फिर अन्य प्रकार का कोई छोटा मोटा पारिवारिक समारोह ही क्यों ना हो। पिछले कुछ समय से देखा जा रहा हैं। कि हर शुभ अवसर और पारिवारिक समारोह में डीजे का प्रचलन तेजी से बढ़ाता ही जा रहा है। खुशी के माहौल में डीजे तो सब को अच्छा लगता हैं। लेकिन क्या आप को पता हैं कि डीजे हम लोगों के लिए कितना घातक साबित हो सकता। इसका अनुमान लगा पाना बहुत ही मुश्किल हैं। डीजे की तेज ध्वनि से बहुत सारी गम्भीर बीमारियां होती हैं। डीजे की तीव्र ध्वनि से आदमी के शरीर की रूह तक कांप उठती है।

बताते है कि डीजे की तेज ध्वनि,वाहनों के प्रेशर हॉर्न और मशीनों की आवाजों से ध्वनि प्रदूषण काफी तेजी से फ़ैल रहा हैं। एक समान्यतौर पर सबके घरो में दिन के समय अधिकतम 25 से 30 और रात्रि में 20-25 डेसिबल तक ध्वनि होनी चाहिए। विशेषज्ञ का कहना है कि डीजे की ध्वनि की तीव्रता करीब 500 डेसीबल होती। लेकिन एक स्वस्थ्य व्यक्ति 50 डेसीबल तक की ध्वनि सहन कर सकता है। डीजे की तेज ध्वनि से व्यक्ति के अंदर चिड़चिड़ापन काफी हद तक बढ़ जाता है। अगर आप डीजे के पास खड़े होते है। तो आप की धड़कने काफी तेज हो जाती हैं। जिससे हर्टअट्क का खतरा बढ़ जाता हैं। खास कर गर्भवती महिलाओं के लिए डीजे बहुत ही घातक साबित हो सकता हैं। क्योंकि डीजे की तेज ध्वनि से गर्भपात का डर रहता है,और मानसिक रूप से विकलांग बच्चे पैदा होने की सम्भावना रहती हैं।