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कोरोना अपडेट : नए वेरिएंट के साथ लोगों को जीना सीखना होगा

कोरोना अपडेट : नए वेरिएंट के साथ लोगों को जीना सीखना होगा

हैदराबाद । कोरोना अनेक वेरिएंट अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा, लैम्ड़ा और डेल्मीक्रोन सामने आ चुके हैं तथा इनमें सैंकड़ों बदलाव आ गए है, मगर अब लोगों को इनके साथ ही जीना होगा। इन विषाणुओं की चपेट में अरबों लोग आ चुके हैं और 50 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई है। दो साल पहले शुरू हुआ कोरोना संक्रमण का खतरा अभी भी नहीं टला है और ऐसा भी नहीं दिख रहा है कि यह वायरस जल्दी ही मानवता का पीछा छोड़ देगा।


इसे देखते हुए चिकित्सकों का मानना है कि लोगों को सावधानी बरतते हुए इसी के साथ जीना सीखना होगा। यूरोप जनवरी 2020 से लगाए गए सभी प्रतिबंधों में ढील देने के लिए तैयार है और लोगों से अपेक्षा की जा रही है कि वे बदले हुए वातावरण के आदी हो जाएं। भारत के लोगों को भी इस तथ्य को स्वीकार करना होगा कि कोविड अब एक स्थानिक विषाणु बन चुका है और यह किसी भी अन्य वायरस या फ्लू की तरह हो गया है जो कभी समाप्त नहीं होगा।


नया वेरिएंट क्या अधिक घातक होगा। इसमें अभी और कितने बदलाव आऐंगे, हम कितने अधिक उत्परिवर्तन देखेंगे, क्या हमने इस वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा हासिल कर ली है,कुछ भी निश्चित नहीं है। हम डॉक्टर अभी भी कोविड के लक्षणों की निगरानी कर रहे हैं लेकिन यह भी जरूरी है कि लोग सतर्क रहें, और सुनिश्चित करें कि वे सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं।


एक बच्चे के समग्र विकास में स्कूल में भाग लेना एक महत्वपूर्ण है। कोविड ने छात्रों को दो शैक्षणिक वर्षों के लिए अपनी कक्षाओं से दूर रखा है, और कुछ ने अपने दोस्तों के साथ अच्छी तरह से बातचीत नहीं की है। इस सबका बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ने की संभावना है। यह महत्वपूर्ण है कि माता-पिता को भी इसे स्वीकार करना होगा कि यह वायरस जल्द ही हमें नहीं छोड़गा इसलिए सतर्क रहें, कोविड के उचित व्यवहार का पालन करें और अपने बच्चों को बेहतर शैक्षणिक और मानसिक विकास के लिए स्कूलों में भेजें।


इसे देखते हुए स्पेन, ब्रिटेन और अन्य देश कोविड प्रतिबंधों में ढील दे रहे हैं तथा कुछ और यूरोपीय देश भी अनिवार्य रूप से मास्क पहनने में रियायत दे रहे हैं। अमेरिका जिसने पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक संक्रमण और मौतें देखी हैं, वह भी प्रतिबंधों में पूरी तरह से ढील दे सकता है। इस बदलते समय को देखते हुए भारत भी पीछे नहीं रह सकता है और उभरते हुए रुझानों के साथ तालमेल बिठाना होगा। इसलिए सबसे अच्छा काम जो लोग कर सकते हैं वह यही है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आत्म-अनुशासन का अभ्यास करें, मास्क पहनें और जहां संभव हो सामाजिक दूरी बनाए रखें, और सामान्य रूप से जीवन जीने की ओर बढ़ें।