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'खाना खाना सबसे अहम Human Rights है', जानिए खास रिपोर्ट

 'खाना खाना सबसे अहम Human Rights है', जानिए खास रिपोर्ट

बीजिंग: हाल ही में अमेरिका (America) के शॉपिंग मॉल और यहां तक कि कुछ स्कूलों में भोजन-आपूर्ति की कमी देखी गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के कई स्कूलों में चिकन, ब्रेड और प्लास्टिक टेबलवेयर की कमी का सामना करना पड़ रहा है, और अमेरिकी छात्रों को भी खाना संकट समस्या का सामना करना पड़ा है। 


उधर मिसौरी स्टेट के नॉर्थ कैनसस सिटी स्कूल में खाद्य और पोषण सेवाओं के निदेशक जेना नुथ ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि तीन बड़े खाद्य वितरकों ने स्कूल जिले की आपूर्ति बंद कर दी है और इससे 21,500 स्थानीय छात्रों के लिए पर्याप्त भोजन की आपूर्ति नहीं की जाएगी। यह स्थिति अन्य जगहों पर भी हो रही है। उदाहरण के लिए, वर्जीनिया स्टेट के रिचमंड में पब्लिक स्कूल कैंटीन के भोजन को सस्ते फास्ट फूड से बदल रहे हैं। मिसौरी स्टेट में लिबर्टी पब्लिक स्कूल के छात्रों को अपना दोपहर का भोजन स्कूल में लाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।


महामारी विरोधी अवधि के दौरान, अमेरिकी सरकार ने लोगों को बड़ी मात्रा में नकद सहायता जारी की, लेकिन इस लाभकारी नीति के सकारात्मक परिणाम नहीं मिले हैं। समाज के निचले स्तर के कई कार्यकर्ताओं ने अपनी नौकरी छोड़ दी है और वे घर में रहकर राहत का इंतजार करने लगे। पर तथाकथित निम्न-स्तर के ये लोग वास्तव में ट्रक ड्राइवर, पोर्ट स्टीवडोर और वेयरहाउस मैनेजर जैसे आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण नौकरी करने वाले हैं। आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में संकट के कारण कीमतों में उछाल आया है, और विभिन्न स्थानों पर हुई हड़तालों ने आपूर्ति को और बाधित किया है।


अमेरिका को विश्व में सबसे विकसित देश के रूप में जाना जाता है। लेकिन अमेरिका में आपूर्ति-संकट क्यों होने लगी है जिससे आम लोगों की खाद्य आपूर्ति को भी प्रभावित है? वास्तव में, अमेरिका में भोजन और अन्य सामानों की कोई कमी नहीं है। महामारी होने पर भी अमेरिका में फसल खराब नहीं हुई है, और अमेरिका अभी भी अन्य देशों से थोक माल का आयात कर रहा है। हालांकि, चाहे वह भोजन हो या अन्य दैनिक आवश्यकताएं, उत्पादन से लेकर उपभोग तक, इसे एक अक्षुण्ण लिंक से गुजरना होता है, जिसे आमतौर पर आपूर्ति-श्रृंखला के रूप में जाना जाता है। हालांकि, महामारी से निपटने में अमेरिकी सरकार की अराजकता और असक्षमता साबित है। और निमार्ताओं और वितरकों को श्रम की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादन लाइन में जनशक्ति की कमी है, और ड्राइवर डिलीवरी चलाने से इनकार करते हैं। यह है आपूर्ति-संकट होने का प्रमुख कारण। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अगस्त में, देश की पोल्ट्री आपूर्ति में 20 प्रतिशत की गिरावट आई, बीफ के भंडार में 7.7 प्रतिशत की गिरावट आई, और पॉर्क मांस के भंडार में 44 प्रतिशत की तेजी से गिरावट आई, जो 2017 के बाद से सबसे कम आरक्षित रिकॉर्ड है।


किसी भी सरकार को अपने लोगों के लिए भोजन और दैनिक आवश्यकताओं की आपूर्ति को सुनिश्चित करना पड़ता है। क्योंकि इससे लोगों के अस्तित्व और समाज की स्थिरता पर भी प्रभावित है। अन्य देशों में मानवाधिकार की बार-बार आलोचना करने के बजाय, अपने ही देश में लोगों की आजीविका के लिए ज्यादा काम करना बेहतर है। लेकिन जब अमेरिका को घरेलू लोगों की आजीविका के साथ गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तब भी वह अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं भूलता है, और मानवाधिकार पर अन्य देशों की क्रूरता से आलोचना करता है, और अनुचित तौर पर उच्च-तकनीकी उत्पादों पर चीन के खिलाफ प्रतिबंध लगाता है।


न्यू कोरोना वायरस महामारी के मुकाबले में, चीन सरकार ने लोगों की आजीविका को सबसे महत्वपूर्ण स्थान पर रखा है। चीन ने महामारी के बाद विश्व में सबसे पहले उत्पादन की बहाली करने में सफल किया है। और चीन ने कभी भी अमेरिका को दैनिक आवश्यकताओं की आपूर्ति बंद नहीं की है। अमेरिका को चीन की ओर से कपड़े, जूते, कागज उत्पाद, चिकित्सा आपूर्ति और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद की आपूर्ति सामान्य स्तर पर हो गयी है। उधर अमेरिका के प्रमुख बंदरगाहों में माल का एक गंभीर बैकलॉग नजर आये है, और माल परिवहन की कीमत में भी तेजी से वृद्धि हुई है। बढ़ती माल ढुलाई दर और आपूर्ति श्रृंखला संकट ने सीधे अमेरिका में आपूर्ति की कमी को जन्म दिया है।


न्यू कोरोना वायरस महामारी ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीरता से प्रभावित किया है। वर्तमान में, दुनिया में कई देशों को अलग-अलग आपूर्ति तनाव का सामना पड़ा है। ऐसी परिस्थितियों में विभिन्न देशों के लिए यह और भी आवश्यक है कि उन्हें आपस में विवादों को छोड़कर, आर्थिक सहयोग को मजबूत करना चाहिये, ताकि महामारी के अंत से पहले सबसे कठिन समय साथ-साथ बिताएं। सभी लोगों को खाना खाने की गारंटी करना है, यह सबसे अहम मानवाधिकार (Human rights) है और किसी भी सरकार की वैधता का आधार ही है।