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Health Tips: क्या होता है ‘लू’? किन लोगों को लगती है Loo, जानिए क्या है लक्षण और उपाय

Health Tips: क्या होता है ‘लू’? किन लोगों को लगती है Loo, जानिए क्या है लक्षण और उपाय

नई दिल्ली | गर्मियों के मौसम में उत्तर-पूर्व और पश्चिम से पूरब दिशा में चलने वाली धुलभरी ,प्रचंड उष्ण और शुष्क हवाओं को लू ( Loo ) कहतें हैं। इस तरह की हवा मई और जून में चलती हैं। लू के समय तापमान 45° सेंटिग्रेड से तक जा सकता है। गर्मियों के इस मौसम में लू चलना आम बात है। ‘लू’ लगना गर्मी के मौसम की बीमारी है। 


‘लू’ लगने का मुख्य कारण


लू लगने का सबसे मुख्य कारण है शरीर में नमक और पानी की कमी होना। पसीने की ‘सूरत’ में नमक और पानी का बड़ा हिस्सा शरीर से निकलकर खून ( Blood ) की गर्मी को बढ़ा देता है। सिर में भारीपन मालूम होने लगता है, नाड़ी की गति बढ़ने लगती है, खून की गति भी तेज हो जाती है। सांस की गति भी ठीक नहीं रहती और शरीर में ऐंठन-सी लगती है। बुखार काफी बढ़ जाता है। हाथ और पैरों के तलुओं में जलन-सी होती रहती है। आंखें भी जलती हैं। इससे अचानक बेहोशी होने लगती है। 


लू से बचने के उपाय


  • लू से बचने के लिए दोपहर के समय बाहर नहीं निकलना चाहिए। अगर बाहर जाना ही पड़े तो सिर और गर्दन को तौलिए या फिर गमछे से ढंक लेना चाहिए। गमछा इस तरह बांधा जाए कि दोनों कान भी पूरी तरह ढंक जाएं।
  • गर्मी के दिनों में हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन करना चाहिए। बाहर जाते समय खाली पेट कभी नहीं जाना चाहिए।
  • गर्मी के दिनों में बार-बार पानी पीते रहना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी नहीं होने पाए। पानी में नींबू और नमक मिलाकर दिन में 2 से 3 बार पीते रहने से लू नहीं लगती है।
  • गर्मी के दौरान नरम, मुलायम, सूती कपड़े पहनना चाहिए जिससे हवा और कपड़े शरीर के पसीने को सोखते रहते हैं।
  • गर्मी में ठंडाई ( Thandai ) का सेवन रोजोना करना चाहिए। इसके साथ ही मौसमी फलों का सेवन करना भी लाभदायक रहता है जैसे- खरबूजा, तरबूज, अंगूर, ककड़ी, खीरा।
  • गर्मी के दिनों में प्याज ( Onion )  का सेवन भी अधिक मात्रा में करना चाहिए। इसके साथ ही बाहर जाते समय कटे प्याज को जेब में रखना चाहिए।




अगर लग गई है ‘लू’ तो फौरन करें ये उपाय


  • लू लगने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। 
  • बुखार तेज होने पर रोगी को ठंडी खुली हवा में आराम करवाना चाहिए।
  • 104 डिग्री से अधिक बुखार होने पर बर्फ की पट्टी सिर पर रखना चाहिए।
  • रोगी को तुरंत प्याज का रस शहद में मिलाकर देना चाहिए।
  • प्यास बुझाने के लिए नींबू के रस में मिट्टी के घड़े और सुराही के पानी का सेवन करवाना चाहिए। बर्फ का पानी नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि इससे लाभ के बजाए हानि हो सकती है।
  • रोगी के शरीर को दिन में 4 से 5 बार गीले तौलिए से पोंछना चाहिए।
  • चाय और कॉफी का सेवन कम कर देना चाहिए।
  • आम के कच्चे कैरी का पना काफी लाभदायक होता है।