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मॉडर्ना की वैक्सीन से टल सकता है मौत का खतरा: स्टडी

मॉडर्ना की वैक्सीन से टल सकता है मौत का खतरा: स्टडी

कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगाई जाने वाली मॉडर्ना वैक्सीन को लेकर हुई एक स्टडी में नई जानकारी सामने आई है। मॉडर्ना संक्रमण को रोकने में 87% सफल होती है। गंभीर बीमारी के खिलाफ 95% और ये मृत्यु के खतरे को टालने में 98% तक सफल है। 


इस संबंध में एक स्टडी ‘द लांसेट रीजनल हेल्थ – अमेरिकाज जर्नल’ में छपा है। इस मूल्यांकन में सामने आया कि मॉडर्ना पांच महीने तक प्रभावी होती है। मॉडर्ना द्वारा कराई गई इस स्टडी में हर उम्र, लिंग, नस्ल के लोगों को शामिल किया गया। 

इस स्टडी में 705,756 लोगों ने हिस्सा लिया। इसमें से आधे लोगों ने टीका लगवाया था जबकि आधे लोगों ने टीका नहीं लगवाया था। 


अमेरिका के सदर्न कैलिफोर्निया में एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल संगठन कैंसर परमानेंट में सहायक अन्वेषक कटिआ ब्रुक्सवूर्ट का कहना है कि इस स्टडी से सामने आया कि संक्रमण, अस्पताल में भर्ती होने और कोविड 19 से मृत्यु के खतरे को कम करने में मॉडर्ना के कोरोना टीके से अच्छे प्रभाव को दर्शाता है।


ब्रक्सवूर्ट के अनुसार रिसर्च के महत्वपूर्ण पहलुओं में मुद्दा ये भी था कि इसमें 7 लाख से अधिक व्यस्कों को शामिल किया गया। स्टडी में वो लोग भी हिस्सा थे जो गंभीर पुरानी बीमारियों, प्रतिरक्षात्मक रुप से संवेदनशील व्यक्ति है।


स्टडी में साढ़े चार महीनों तक मॉडर्ना टीके की दोनों खुराके उन लोगों को दी गई जिनका टीकाकरण पहले पूरा हो चुका था। इसमें सामने आया कि इनमें कोविड 19 के टीके की प्रभाव 87% था। उन्होंने कहा कि टीका लेने वालों में 13 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया जबकि टीका नहीं लेने वालों में 182 संक्रमितों को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। वहीं टीका लगवाने वालों में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई जबकि टीका न लगवाने वालों में 25 मरीजों की मृत्यु हुई।


कुछ महीनों पहले कंपनी ने जानकारी दी थी कि कोविड 19 रोधी टीका वयस्कों के साथ 12 वर्ष के बच्चों पर प्रभावी है। कंपनी ने 12 से 17 वर्ष के बच्चों पर अध्ययन किया, जिसमें सामने आया कि किशोरों की प्रतिरोधी तंत्र की सुरक्षा पर काम करता है। इसके साथ ही बांह में सूजन, सिरदर्द, थकान जैसी परेशानियां भी सामने आ सकती है। 


जांच में सामने आया कि मॉडर्ना टीके की दो खुराक लेने के बाद बच्चों में कोविड के मामले नहीं मिले। वहीं जिन्हें डमी टीके लगाए गए थे उनमें चार मामले सामने आए।