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मंत्री ने आखिर ऐसा क्यों कहा, पटरी से उतर सकती है कोरोना रोकथाम की प्रक्रिया

मंत्री ने आखिर ऐसा क्यों कहा, पटरी से उतर सकती है कोरोना रोकथाम की प्रक्रिया

नई दिल्ली। केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने सभी प्रमुख राज्‍यों के प्रधान सचिवों तथा मिशन निदेशकों (राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन) के साथ परस्‍पर बातचीत की और इन राज्‍यों में कोविड-19 टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा की।

उन्‍होंने रेखांकित किया कि भारत की कोविड-19 टीकाकरण यात्रा में तात्‍कालिक ऐतिहासिक उपलब्धि 100 करोड़ टीका लगाना है। भारत में अभी तक 94 करोड़ टीके लगाए जा चुके हैं। त्‍योहार आमतौर पर शुभता, आनंद और बड़े जन समूहों के पर्याय होते हैं और अगर कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार ये नहीं मनाए गए तो कोविड-19 की रोकथाम की प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है।

उन्‍होंने कहा कि दोहरा समाधान यही है कि कोविड प्रोटोकॉल का बहुत सख्‍ती से अनुपालन किया जाए और टीकाकरण की गति में तेजी लाई जाए।उन्‍होंने उन प्रयोगों के परिणामों को संदर्भित किया जिनमें अनुमान लगाया गया था कि टीका की पहली खुराक प्राप्‍त करने वालों में गंभीर रूप से कोविड-19 का शिकार न बनने वालों की संख्‍या 96 प्रतिशत है और उन्‍होंने यह भी बताया कि ऐसे लोगों में यह बढ़कर लगभग 98 प्रतिशत पहुंच जाता है, जिन्‍होंने टीके की दोनों खुराकें ली हैं।

यह देखते हुए कि राज्‍यों के पास आठ करोड़ से अधिक टीके शेष हैं, उन्‍होंने राज्‍यों द्वारा टीकाकरण की गति तथा लक्षित आबादी के बीच टीकाकरण कवरेज बढ़ाने की राह में आने वाली विशिष्‍ट बाधाओं के बारे में पूछताछ की। कई राज्‍य शहरी क्षेत्रों में कवरेज की पूर्णता के निकट पहुंच रहे हैं और वे नगर में चलायमान आबादी की मांगों को भी पूरा कर रहे हैं।

इसी प्रकार, भौगोलिक रूप से कुछ अलग पड़ चुके क्षेत्रों में कड़ी मेहनत और अधिक समय लगाकर प्रत्‍येक दरवाजे पर जाकर टीकाकरण किया जा रहा है, जहां पहली खुराक का कवरेज लगभग पूरा होने के निकट है। सामूहिक टीकाकरण अभियान आरंभ करने वाले उत्‍तर प्रदेश जैसे राज्‍यों ने तुलनात्‍मक रूप से कोवैक्‍सीन की सीमित आपूर्ति तथा दो खुराकों के बीच कम समय अवधि को टीकाकरण की गति बढ़ाने में अवरोध का कारण बताया।

राज्‍यों के परामर्श से, मंत्री ने प्रत्‍येक राज्‍य को अपने लक्ष्‍य में वृद्धि करने की अपील की जिससे कि अगले कुछ दिनों में 100 करोड़ की संख्‍या तक पहुंचने के लिए अंतिम छह करोड़ खुराकें लगाई जा सके। बैठक में आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्‍तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्‍थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्‍तराखंड, उत्‍तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों ने भाग लिया।


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