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धुंडीराज विनायक की पूजा करने से भगवान शिव की कृपा होती है प्राप्त

धुंडीराज विनायक की पूजा करने से भगवान शिव की कृपा होती है प्राप्त

भगवान श्री गणेश को समर्पित श्री धुंडीराज विनायक मंदिर, विश्वनाथ गली वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थित है। काशी में हजारों मंदिर हैं जिनमें से 56 श्री गणेश के हैं, और उनमें श्री धुंडीराज विनायक मंदिर विशेष हैं। ऐसा माना जाता है कि काशी में परिक्रमा करने के बाद श्री धुंडीराज विनायक को प्रणाम करना चाहिए। श्री धुंडीराज विनायक की मूर्ति काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर मौजूद है। स्कंद पुराण के काशी खंड में भगवान श्री गणेश की महिमा का महिमामंडन किया गया है।

स्कंद पुराण के काशी खंड में वर्णित एक कथा के अनुसार श्री धुंडीराज विनायक, श्री गणेश का रूप हैं। स्कंद पुराण के अनुसार, राजा दिवोदास को काशी का शासन भगवान ब्रह्मा ने इस शर्त पर दिया था कि सभी देवताओं को काशी छोड़नी होगी, यहां तक कि भगवान शिव को भी काशी छोड़ना होगा। भगवान शिव ने बहुत कोशिश की लेकिन वह दिवोदास से काशी नहीं ले पाए। अंत में भगवान श्री गणेश दिवोदास से काशी वापस लेने में सफल रहे और भगवान विष्णु की मदद से इसे भगवान शिव को सौंप दिया। इसके बाद वे छप्पन विनायक के रूप में वाराणसी में बस गए।

दिवोदास के काशी से प्रस्थान के बाद भगवान शिव माता पार्वती, सभी रुद्रगण, ऋषियों एवं कई अन्य देवताओं के साथ मंदराचल से काशी पहुंचे। भगवान शिव ने काशी में कदम रखते ही सबसे पहले श्री गणनायक की पूजा की और उनकी प्रशंसा की साथ ही यह घोषणा की कि इस स्थान पर भगवान श्री गणेश को धुंडीराज के रूप में जाना जाएगा और जो तीर्थयात्री भगवान शिव से पहले धुंडीराज की पूजा करेंगे, उन सभी पर भगवान शिव की कृपा होगी। ऐसा माना जाता है कि जो श्रद्धालु नियमित रूप से श्री धुंडीराज विनायक की पूजा करते हैं, वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं और मोक्ष प्राप्त करते हैं।