वुहान लैब में कोरोना उत्पत्ति को नकारने वाले वैज्ञानिक लैब से जुड़े

वुहान लैब में कोरोना उत्पत्ति को नकारने वाले वैज्ञानिक लैब से जुड़े

लंदन | कोरोना वायरस (Corona Virus) पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है, लेकिन अभी भी वैज्ञानिक इस बात का पता नहीं चला पाए हैं की इस वायरस की उत्पत्ति (Orijin of Corona Virus) कैसे और कहाँ हुई। सबसे पहले चीन के वुहान में पाए जाने वाले इस घातक वायरस की उत्पत्ति के आरोप अक्सर चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (Wuhan Institute of Virology) पर लगते आये हैं।  

इस सिद्धांत को हालांकि खारिज कर दिया गया था लेकिन अब एक ऐसा तथ्य सामने आया है जिसने एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी है। वुहान लैब से कोविड-19 (Covid - 19) के लीक होने के सिद्धांत को खारिज करने वाले वैज्ञानिकों का संबंध इस लैब से है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल 7 मार्च को द लैंसेट में प्रकाशित एक पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले वैज्ञानिकों में से एक ने लैब-लीक सिद्धांत को खारिज कर दिया था।

27 वैज्ञानिकों द्वारा हस्ताक्षरित और ब्रिटिश प्राणी विज्ञानी पीटर दासजक द्वारा शुरू किए गए लैंसेट पत्र ने इस वैज्ञानिक बहस को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया कि क्या कोरोना वायरस में हेरफेर किया गया था या चीनी लैब से लीक किया गया था।

दासजक अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी इकोहेल्थ एलायंस के अध्यक्ष हैं, जिनका चीन से सीधा संबंध है। फर्म ने डब्ल्यूआईवी में अनुसंधान को भी वित्त पोषित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने वुहान में कोरोनावायरस के प्रकोप के आसपास 'साजिश के सिद्धांतों की कड़ी निंदा' की।

सूचना की स्वतंत्रता अनुरोध का उपयोग करते हुए किए गए चौंकाने वाले रहस्योद्घाटन से पता चला है कि 8 फरवरी को दासजक द्वारा भेजे गए एक ईमेल से पता चला है कि उन्हें चीन में 'हमारे सहयोगियों' द्वारा 'समर्थन दिखाने' के लिए पत्र लिखने का आग्रह किया गया था।

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