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हिमालय की झीलों पर लगाए जा रहे हैं सेंसर, ग्लेशियर और झीलें अब नहीं बनेगी तबाही का कारण

हिमालय की झीलों पर लगाए जा रहे हैं सेंसर, ग्लेशियर और झीलें अब नहीं बनेगी तबाही का कारण

उत्तराखंड में केदारनाथ घाटी आपदा के बाद से भू विज्ञान संस्थान ने उत्तराखंड के सभी ग्लेशियर और उनके आसपास की जितनी भी झीलें है उन सभी झीलों में सेंसर लगाना शुरू कर दिया है, भू विज्ञान संस्थान के मुताबित लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

16 जून 2013 को केदारनाथ मंदिर से ऊपर की तरफ चोराबाड़ी झील में हिमस्खलन हुआ, जिससे झील का जलस्तर बढ़ गया और पानी तबाही मचाते हुए नीचे की तरफ आ गया जिससे हजारों लोगों की मौत हो गई इस घटना के बाद वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने सभी झीलों और ग्लेशियरों का सर्वे कराया और सेंसर लगवाना शुरू कराया वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के अनुसार अभी तक लगभग 70 प्रतिशत झीलों में यह कार्य हो चुका है।

झीलों और ग्लेशियरों में सेंसर लगने से जैसे ही झील का जलस्तर बढ़ेगा या बदल फटेगा सेंसर कंट्रोल रूम को सन्देश दे देगा और वैज्ञानिक झील को पंचर कर देंगे या झील की एक तरफ खुदाई करके धीरे धीरे पानी को निकल देंगे जिससे विपदा टल जाएगी, यह बिल्कुल वही प्रक्रिया है जैसे हमारे घरों में पानी की टंकी में सेंसर लगा होता है, जब टंकी पूरी भरने वाली होती है तभी सेंसर सन्देश देता है और मोटर बंद कर दिया जाता है।