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माता वैष्णो देवी मंदिर - श्रद्धालुओं की अनंत आस्था का प्रतीक

माता वैष्णो देवी मंदिर - श्रद्धालुओं की अनंत आस्था का प्रतीक

माता वैष्णो देवी मंदिर, जम्मू के कटरा शहर में, त्रिकुटा पहाड़ियों के बीच में विराजमान है।यह मंदिर समुद्र तट से 5300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। वैष्णो देवी, भारत की यात्रा करने वाले भारतीयों और विदेशी पर्यटकों, दोनों के लिए पसंदीदा तीर्थस्थलों में से एक है। हर साल जम्मू जिले में कटरा के पास इस पवित्र स्थान पर श्री माता वैष्णो देवी के दर्शन मात्र करने के लिए हजारों और लाखों लोग आते हैं।

वैष्णो देवी का इतिहास

वैष्णो देवी का इतिहास त्रेता युग से है जब पूरी पृथ्वी राक्षसों के शासन से घिरी हुई थी और इस संसार की रक्षा के सेतु, माँ वैष्णवी का निर्माण किया गया था, जो महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का संयोजन हैं। इन तीनों देवीओं की ऊर्जा-संयोजन से ही संसार में बुराइयों का नाश करने में मदद मिली।

माँ वैष्णो देवी मंदिर तक कैसे पहुंचे

माँ वैष्णों देवी की यात्रा करने के लिए आपके पास कई विकल्प मौज़ूद हैं, जिसमें से पहला विकल्प है पदयात्रा। मुख्य द्वार से माँ वैष्णों देवी के भवन तक की कुल यात्रा लगभग 12 किलोमीटर की है और बाबा भैरव नाथ मंदिर तक कुल यात्रा 14 किलोमीटर की है। इस पदयात्रा को भी आप 2 प्रकार से कर सकते हैं, पहला पुराने या नए मार्ग पर पदयात्रा करते हुए और दूसरा सीढ़ियों के माध्यम से। माँ वैष्णों देवी में करीब 3500 से 4500 सीढ़ियां हैं। आप घोड़ो, खच्चरों और पालकी की सहायता से भी इस यात्रा को पूरा कर सकते हैं या फिर हेलीकॉप्टर के माध्यम से वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंचना सबसे आसान और सुविधाजनक विकल्पों में से एक है। यह यात्रा आधार शिविर (कटरा ) से लेकर माँ वैष्णों देवी भवन के निकट सांझी छत हेलीपैड तक संचालित होती हैं। सांझी छत से भवन की दूरी 3 किमी से भी कम है।

माँ वैष्णों देवी यात्रा करने के लिए मुख्यतः दो मार्ग मौजूद हैं-

मुख्य मार्ग (पुराना मार्ग)

पहले भवन तक जाने का रास्ता बहुत ही उबड़-खाबड़, टूटा-फूटा, कच्चा और टेढे मेढे पत्थरों, गड्ढों से भरा पड़ा था। लेकिन कुछ से बाद सारा रास्ता फिर से समतल और चौड़ा करके, पक्का बनाकर इन पर टाइलें बिछा दी गई हैं। सीधी और जटिल उतराइयों-चढ़ाइयों को सुधार कर उन्हें आसान बनाया गया। रास्तों के किनारे रेलिंग लगा दी गई है। तीर्थ यात्रियों को धुप, बारिश और बर्फ़बारी से बचाने के लिए पांच किलोमीटर से अधिक मार्ग को शैल्टरों से ढक दिया गया है। पहले इस मार्ग में रोशनी की कोई भी व्यवस्था नहीं थी लेकिन अब 1200 हाई प्रेशर सोडियम वेपर लैम्प सम्पूर्ण मार्ग को रोशन कर रहें हैं। पीने योग्य जल को उपलब्ध कराने के लिए बाण गंगा से भवन तक के रास्ते में 120 जल स्थल हैं और लगभग 20 वाटर कूलर उपलब्ध कराये गए हैं। अब भवन तक के रास्ते में सफाई की व्यवस्था सहित लगभग 600 आधुनिक शौचालय भी उपलब्ध करवाए गए हैं।

नया मार्ग

पुराने तंग पैदल रास्ते पर, बढ़ती हुयी तीर्थयात्रियों की भीड़ और आने जाने वाली पालकियों, खच्चरों के कारण होने वाली परेशानियों को ध्यान में रखते हुए नए मार्ग का निर्माण किया गया। यह मार्ग पुराने रास्ते की तुलना में छोटा, कम चढ़ाई वाला और अधिक सुखद है और इस रास्ते से खच्चरों और पालकी वालों को जाने की अनुमति नहीं है।

यह मार्ग इंद्रप्रस्थ नामक स्थल से जो की अद्धकुआरी के निकट से प्रारम्भ होता है और माँ वैष्णो के भवन के समीप समाप्त होता है। यह मार्ग पुराने मार्ग की तुलना में अत्यधिक चौड़ा और सुगम है। इस मार्ग पर कुछ-कुछ दूरी पर पीने के पानी के स्थल बनाए गए है और वाटर कूलर भी लगाए गए हैं। खाद्य और पेय पदार्थों आदि के जगह-जगह पर बिक्री केन्द्र भी बनाये गए हैं। नए मार्ग पर काफी संख्या में शौचालय भी बनाए गए हैं और इस मार्ग पर पर्याप्त संख्या में शैल्टर शैड भी बनाए गए हैं ताकि यात्रियों को मौसम की मार से बचाया जा सके। इस नए मार्ग पर बैटरी वाहन भी चलते हैं, जो यहाँ आये हुए श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाते हैं।

माँ वैष्णो देवी यात्रा के मुख्य पड़ाव

मुख्य गेट (कटरा) से यात्रा आरंभ करने से लेकर बाबा भैरव नाथ मंदिर तक की सम्पूर्ण यात्रा में कुछ पड़ाव आते हैं-

बाण गंगा

बाण गंगा शब्द, बाण और गंगा के समायोजन से बना है। बाण का अर्थ है तीर और गंगा का अर्थ है पवित्र नदी गंगा। पहली चेक पोस्ट के पश्चात् यात्री एक छोटे पुल पर पहुंचते है, जिसके नीचे से बाण गंगा कल-कल की ध्वनि करते हुए बहती है। इस नदी में वर्ष भर जल रहता है। यह नदी काफी पवित्र मानी जाती है और हिन्दु परंपरा के अनुसार अपनी यात्रा को प्रारम्भ करने से पहले यात्री इस नदी में स्नान करना अनिवार्य मानते हैं, इसलिए यहां पर कुछ घाटों का निर्माण भी किया गया है। ऐसा माना जाता है कि जब माता वैष्णो देवी अपनी पवित्र गुफा की ओर साधना करने जा रहीं थी तब उन्होंने अपने तरकश के एक बाण से इस झरने को अवतरित किया, जिसके कारण ही इसे “बाण गंगा” के नाम से जाना जाता है। साथ ही ऐसी अवधरणा  भी है कि माता रानी ने यहाँ स्नान कर अपने बाल भी धोये थे, इसलिए यात्री इसे “बाल गंगा” नाम से भी जानते हैं।

चरण पादुका

समुद्र तल से 3380 फुट की ऊंचाई पर और बाण गंगा से लगभग 1.5 किलोमीटर की दुरी पर "चरण पादुका” स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ एक चट्टान पर माता रानी के पवित्र चरणों के निशान बने हुए हैं। यात्रीगण माता रानी के पवित्र चरणों के निशान के दर्शन कर के ही अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं।

अद्धकुआरी

अद्धकुआरी शब्द का अर्थ है अनंत कुमारी। समुद्रतल से 4800 फुट की ऊंचाई पर तथा इद्रप्रस्थ से लगभग 500 मीटर की दूरी पर अद्धकुआरी स्थित है। पदयात्रा कर रहे यात्रिओं के लिए अद्धकुआरी आधे रास्ते पर स्थित है क्योकि कटरा से अद्धकुआरी तक की कुल दूरी 6 किलोमीटर है और अद्धकुआरी से भवन तक की दूरी भी 6 किलोमीटर की ही है। यहाँ की पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जब माँ वैष्णो ने एक छोटी सी बालिका का रूप धारण कर के पण्डित श्रीधर द्वारा आयोजित भण्डारे में गयीं और फिर वहाँ से लुप्त होने के पश्चात बाण गंगा और चरण पादुका में रुकी, जिसके पश्चात् माँ वहां से अद्धकुआरी पहुंची। जहां माता रानी ने 9 महीनें, कोख के आकार वाली, एक छोटी सी गुफा में ध्यान लगाया। इस गुफा का कोख के आकर का होने के कारण ही, यह गुफा “गर्भजून” के नाम से भी प्रसिद्ध है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि इस गुफा के दर्शन करने वाले श्रद्धालु के सारे पाप धुल जाते है और उसकी आत्मा पुनः शुद्ध हो जाती है इसीलिए यात्रीगण यहाँ का दर्शन अवश्य करते हैं।

सांझीछत

माता वैष्णो देवी के मंदिर से 2.5 किलोमीटर पहले स्थित है सांझीछत। यह स्थान सुंदर और आकर्षक दृश्यों से परिपूर्ण हैं इसलिए तीर्थ यात्री यहां रूकना आनंदित समझते है।

यहाँ पर कई सारे फ़ब्बारों का निर्माण भी किया गया है और फ्लड लाइट्स की भी व्यवस्था भी करी गयी है जो की इस स्थान को अत्याद्धिक सुंदर बनती है। यात्रियों को चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए यहाँ 24 बिस्तरों वाले अस्पताल का भी निर्माण करवाया गया। इस स्थान पर एक हैलीपैड भी है। इस हैलीपैड से की सहायता से आधार शिविर (कटरा) से सांझीछत के बीच हैलीकॉप्टर की सेवा प्रदान की जाती है।

माँ वैष्णों देवी भवन

माता वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा को सर्वोच्तम तीर्थ यात्राओं में से एक माना जाता है। श्री माता वैष्णो देवी का भवन, तीन चोटियों वाले त्रिकुटा या त्रिकूट पर्वत की तलहटियों में एक पवित्र गुफा के रूम में विद्यमान है। यहाँ लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री इस पवित्र गुफा के दर्शन करने आते हैं।

समुंद्र तल से 5200 फुट की ऊंचाई पर, माता रानी की यह पवित्र गुफा स्थित है। यात्रीगण कटरा से लगभग 12 किलोमीटर की यात्रा कर माता के भवन पहुंचते हैं। यहाँ पहुंच कर यात्री पवित्र गुफा में देवी माता के दर्शन प्राप्त करते हैं। प्राकृतिक रूप से बनी हुई तीन चट्टानें, जिन्हें “माता जी की पिण्डियां” नाम से जाना जाता है, जिसके दर्शन भक्तगण करते हैं। यह तीन पिंडियां, महाकाली (दाएँ), महासरस्वती (बाएँ) और महालक्ष्मी (मध्य) के रूप में इस गुफा में विराजमान है, इन तीनों पिण्डियों के मिश्रित रूप को ही माता वैष्णो देवी का रूप कहा गया है।

भवन की पौराणिक कथा

ऐसा माना जाता है कि जब भैरोंनाथ ने माता वैष्णों देवी को अद्धकुआरी (गर्भजून) में ढूंढ़ लिया तो माता रानी को वह स्थान छोड़ना पड़ा और अद्धकुआरी से पवित्र गुफा तक माँ वैष्णो देवी पर्वत की चढ़ाई चढ़ती हुई गयीं, लेकिन भैरोंनाथ ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और वह उनके पीछ- पीछे पवित्र गुफा तक भी पहुंच गया और माँ को ललकारने लगा। अंततः माता रानी ने अपना दिव्य रूप धारण किया और भैरोंनाथ का सिर उसके धड़ से अलग कर दिया। माता रानी की तलवार के वार में इतनी ज़्यादा ताकत थी कि भैरोंनाथ का सिर उसके धड़ से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ की चोटी पर जा गिरा, जिस स्थान पर वर्तमान समय में बाबा भैरोंनाथ मंदिर स्थित है। जबकि बाबा भैरोंनाथ का धड़ पवित्र गुफा के द्वार पर ही गिरा पड़ा रहा। तत्पश्चात देवी मां ने उस पवित्र गुफा में साधना की, जहां उनके पिण्डी रूप में पवित्र प्रतीक विराजमान हैं।

बाबा भैरों नाथ मंदिर

माँ वैष्णो देवी के दर्शन के बाद, भैरों नाथ के दर्शन करना अनिवार्य है वरना आपकी वैष्णो देवी की यात्रा को अपूर्ण माना जाता है।यह मंदिर माता रानी के भवन से लगभग 2.5 किमी दूर है और यह इस यात्रा का अंतिम पड़ाव है।