होम > दुनिया

नेपाल की 2 सबसे बड़ी पार्टियों में फूट: ओली की बढ़ी मुश्किलें

नेपाल की 2 सबसे बड़ी पार्टियों में फूट: ओली की बढ़ी मुश्किलें

काठमांडू | नेपाल में राजनीतिक उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है।  अब राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी (President Vidya Devi Bhandari) द्वारा अध्यादेश जारी किए जाने के बाद बुधवार को संसद में नेपाल की पहली और चौथी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों में फूट पड़ गई। नेपाल सरकार ने मंगलवार को राष्ट्रपति विद्या देवी को नए दलों के गठन में ढील देने के लिए मौजूदा राजनीतिक दल अधिनियम में संशोधन करने की सिफारिश की थी।

राष्ट्रपति द्वारा अध्यादेश जारी किए जाने के कुछ घंटों बाद, संसद में नेपाल की सबसे बड़ी पार्टी, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of Nepal) अलग हो गई है। यूएमएल के अध्यक्ष पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली (Former prime Minister KP Sharma Oli) हैं।

सदन में चौथी सबसे बड़ी पार्टी जनता समाजवादी पार्टी, जिसके निचले सदन में 32 विधायक हैं, भी टूट गई है। वरिष्ठ यूएमएल नेता और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल (MAdhav Kumar Nepal) ने मदर पार्टी से अलग होने की घोषणा की और बुधवार को चुनाव आयोग के साथ एक नई पार्टी - नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी यूएमएल-सोशलिस्ट का पंजीकरण कराया।

ओली और माधव लंबे समय से पार्टी में एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे हैं और पिछले दो वर्षो से उनके बीच पार्टी के अंदर गहरा कलह, विवाद और विभाजन था।123 सांसदों में से, माधव नेपाल ने 30 का समर्थन हासिल किया और एक नई पार्टी का गठन किया, जो नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व में चल रहे सत्तारूढ़ गठबंधन का भी हिस्सा है।

माधव गुट के वरिष्ठ नेता राजेंद्र पांडेय ने चुनाव आयोग में नई पार्टी का पंजीकरण कराने के बाद कहा कि ओली द्वारा सदन को दो बार भंग करने और पार्टी की एकता बनाए रखने में विफल रहने की अपनी गलती को स्वीकार करने में विफल रहने के बाद, उन्होंने अंतत: विभाजन का फैसला किया।

ओली खेमे ने इसे 'नेपाल के कम्युनिस्ट आंदोलन में काला दिन' कहा। संशोधन अध्यादेश में कहा गया है कि एक संसदीय दल के 20 प्रतिशत या अधिक सदस्य और एक राजनीतिक दल की केंद्रीय समिति अपनी मूल पार्टी से अलग हो सकती है। संशोधन से पहले, राजनीतिक दल अधिनियम के प्रावधानों में असंतुष्टों को संसदीय दल में 40 प्रतिशत सदस्यों का समर्थन और अपनी मातृ पार्टी से अलग होने के लिए केंद्रीय समिति की आवश्यकता थी।

सीपीएन-यूएमएल, जो एक समय दो-तिहाई बहुमत का दावा करता था, अब दो गुटों में विभाजित हो गया है। माधव नेपाल की पार्टी के पंजीकरण की सुविधा के लिए शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार को राष्ट्रपति भंडारी को अध्यादेश जारी करने की सिफारिश की थी।

इसी तरह सदन की चौथी सबसे बड़ी पार्टी जनता समाजवादी पार्टी भी औपचारिक रूप से अलग हो गई है। पार्टी के अध्यक्ष महंत ठाकुर के नेतृत्व में पार्टी के एक वर्ग ने अध्यादेश जारी होने के बाद बुधवार को चुनाव आयोग में एक नई पार्टी का पंजीकरण कराया। ठाकुर गुट का एक अन्य अध्यक्ष उपेंद्र यादव के साथ लंबे समय से विवाद है। ठाकुर ने जनता समाजवादी पार्टी नेपाल (डेमोक्रेटिक) नाम से एक नई पार्टी बनाई है।

देउबा सरकार ने बहुमत हासिल करने के लिए अध्यादेश पेश किया था। अब नेपाल की नई पार्टी देउबा सरकार में शामिल होगी। यह निश्चित नहीं है कि ठाकुर की नई पार्टी नई सरकार में शामिल होगी या नहीं, लेकिन यह सरकार का समर्थन करना जारी रखेगी, यह बात इसके नेता राजेंद्र महतो ने कही है।

जनता समाजवादी पार्टी के अन्य अध्यक्ष उपेंद्र यादव देउबा की सरकार में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एक अन्य प्रमुख गठबंधन सहयोगी, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी सेंटर) पहले से ही सरकार में है। इसके अध्यक्ष पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' हैं।