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बिहार के बगहा में आदमखोर हुए बाघ को एसटीएफ शूटर्स ने किया ढेर

बिहार के बगहा में आदमखोर हुए बाघ को एसटीएफ शूटर्स ने किया ढेर

बिहार के बगहा में एक साल के अंदर 9 लोगों की जान ले चुके आदमखोर बाघ को एसटीएफ शूटर्स ने ढेर कर दिया है , जिसकी काफी लम्बे अर्से से तलाश जारी थी। गांव वाशियों द्वारा शेर की दहाड़ की आवाज सुनने के सुचना के तुरंत बाद मौके पर पहुँची एसटीएफ की टीम द्वारा उसे गोवर्धन थाना इलाके के बलुआ गांव के खेत में उसका घेराव किया गया, जिसके बाद शूटर्स ने उसे 4 गोलियां मारीं। आखरी वक्त बाघ गांव की ही एक माँ-बेटे को लिगल गया। 


गन्ने के खेतो के पास मिले बाघ के पैरों के पुख्ता सबूत मिलने के बाद एक्सपर्ट की टीम जाल द्वारा खेत की चारो और से घेरा बंदी करा दी गई,  जिसके बाद राइफल से लैस एसटीएफ की टीम हाथी पर सवार हो गन्ने के खेत के अंदर गई, जहाँ बाघ को देखते ही एसटीएफ की टीम ने  SLR राइफल से 4 गोली मारी, जिसके बाद  बाघ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। 3 फीट ऊँचे और 5 फीट लम्बे बाघ को उठाने के लिए 8 लोगों को लगना पड़ा।


जानकारों के अनुसार मारे गए बाघ के पिता T-5 और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के हड़नाटांड वन क्षेत्र की T-34 के संबंध के बाद  T-34 मां बन गई। पिता T-5 टेरिटरी वन के बाहरी हिस्से की तरफ रहता था, ऐसे में अपने बच्चों को T-5 से बचाने के लिए T-34 गन्ने के खेतों में रहने लगी। उन्ही बच्चों में से यह बाघ हड़नाटांड, चिउटाहा में गन्ने के खेतों के साथ-साथ VTR डिवीजन के राघिया और गोबरधना वन रेंज में लगातार मूवमेंट कर रहा है। इस बाघ ने कई दफा जंगल में जाना चाहा, लेकिन पिता के डर से अंदर नहीं गया। इसके बाद बाहर ही भोजन की तलाश करने लगा,  जिस दौरान इसने मनुष्यो को पहला शिकार बनाया, इसके बाद एक के बाद एक आदमी का शिकार शुरू कर दिया।


पिछले एक महीने से बाघ ने बगहा गांव में कुछ ज्यादा ही आतंक मचा रखा है, जिसके बाद से बाघ को पकड़ने के लिए 13 सितंबर को आदेश जारी करना पड़ा, आदमखोर बाघ की मौत के बाद उसका नामोनिशान मिटा दिया जाता है, जिसके लिए एसओपी बनाई गई है, उसमें बाघ का पहले पोस्ट मार्टम कराया जायेगा,  तत्पश्चात पंचनामा की कार्रवाई होती है, पोस्ट मार्टम के लिए पूरी टीम गठित की जाती है।


फिर बाघ को अफसरों की मौजूदगी में जलाया जायेगा, जब तक बाघ का पूरा नामोनिशान नहीं मिट जाता तब तक उसे अफसरों की मौजूदगी में जलाया जाता है। इसके अलावा फील्ड निदेशक की उपस्थिति या ऑथराइजड अफसर की मौजूदगी में ही अंतिम संस्कार किया जाता है।


बाघ के शव को जलाने के दौरान पूरी वीडियोग्राफी कराई जाती है। इस दौरान सामाजिक संस्था का प्रतिनिधित्व करने वालों को भी रखा जाता है। फोटोग्राफ और वीडियोग्राफी के साथ साइट छोड़ने से पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि बाघ का शव उसकी हड्डियां पूरी तरह से जल चुकी है।