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अशोक गहलोत के बदले रुख से सचिन पायलट को मिल सकता है मौका

अशोक गहलोत के बदले रुख से सचिन पायलट को मिल सकता है मौका

कांग्रेस में होता वही है, जो सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी चाहते है, भले ही कांग्रेस का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष कोई भी और या पार्टी की कमान कोई भी संभाल रहा हो। कांग्रेस देखने में तो दिल्ली में एक के बाद एक बैठक कर विधायकों और पार्टी के सदस्यों को मीटिगं में बुलाती है, पर असल में वो सिर्फ एक दिखावा होता है , होता वही हैं जो सोनिया और राहुल गाँधी चाहते है।

इसी सिलसिले में नाराज अशोक गहलोत ने दिल्ली से आए सोनिया गांधी द्वारा बुलाई बैठक में न पहुंचकर विधायकों की अलग मीटिंग कर शायद कांग्रेस को अपनी नाराजगी जाहिर करा दी हैं। एक तरफ जहाँ सोनिया गांधी पर्यवेक्षकों की लिखित रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं, जिसके बाद कोई ऐक्शन लिया जा सकता है। वहीं दूसरी तरफ सचिन पायलट इस पूरे घटनाक्रम को भांपते हुए अपने लिए मौके की तलाश में दिख रहे है। सचिन पायलट के पास वैसे देखा जाये तो समर्थकों की कमी नहीं है, इसके बावजूद वो दूसरे विधायकों से भी संपर्क साधना शुरू कर दिए है। दरसल सचिन पायलट सोच रहे हैं कि अगर अशोक गहलोत के खिलाफ कोई एक्शन होता है तो वो इस मौके को आसानी से भांप कर इसका फायदा उठाने में समर्थ है।

फ़िलहाल सभी पार्टी हाईकमान के फैसले का इंतजार करें, परन्तु कांग्रेस के ही विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सचिन पायलट और कांग्रेस पार्टी हाईकमान के बीच पहले से ही सबकुछ तय माना जा रहा है। उनका मानना है कि यदि अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उतरते हैं तो फिर उन्हें सीएम नहीं रहना चाहिए। इसके अलावा सचिन पायलट ने अशोक गहलोत पर आरोप मढ़े है की वो विधायकों को एक साथ अपनी ओर मिलाने की सोंच रहे है।

दिल्ली में कांग्रेस की ओर से सोनिया गाँधी की मीटिंग के बाद से सचिन पायलट को सीएम बनाने की माँग करने वाले विधायकों ने फिर से एकजुटता दिखाना शुरू कर दिया है, सचिन पायलट समर्थक विधायकों ने उनके घर पर पहुँच उन्हें बधाई देने लगे हैं।

सचिन पायलट के घर पहुंचे विधायक खिलाड़ी लाल बैरवा ने 2023 के चुनाव के लिहाज से हाईकमान और सरकार में बदलाव की बात कही, हांलाकि ये हाईकमान को ही तय करना है कि राजस्थान में इस बार सीएम कौन होगा। परन्तु एक बात के साफ कयास लगाए जा रहे हैं कि अशोक गहलोत के बागी तेवरों के चलते सोनिया गांधी उनसे खफा हैं जिसके बाद से उन्होंने पर्यवेक्षकों से राजस्थान में हुए घटनाक्रम को लेकर लिखित रिपोर्ट मांगी है, तथा इस घटना क्रम के बाद से अब सचिन पायलट के सीएम पद की दावेदारी तय मानी जा रही है।