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गर्दभ व खच्चर पर आश्रित लोगो की स्थिति पर स्टेकहोल्डर्स की वर्कशाप का आयोजन

गर्दभ व खच्चर पर आश्रित लोगो की स्थिति पर स्टेकहोल्डर्स की वर्कशाप का आयोजन

पशुपालन निदेशालय सभागार में उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय पशुधन अनुसंधान संस्थान की तकनीकी भागीदारी से प्रदेश में गर्दभ व खच्चर की स्थिति तथा इन पर आजीविका के रूप में आश्रितों की स्थिति पर एक वर्कशाप का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में निदेशक प्रशासन एवं विकास डा० इन्द्रमनि एवं निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डा० पी०के० सिंह ने गर्दभो की घटती हुई संख्या के मद्देनजर उनके संरक्षण एवं संवर्धन पर बल दिया। 

अन्तर्राष्ट्रीय पशुधन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डा० थन्नामल एवं डा० रमेश कुमार ने उत्तर प्रदेश में गर्दभ पालको की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने हेतु शोधपत्र प्रस्तुत किये। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा० अनुराधा भारद्वाज से गर्दभ के दूध की औषधीय महत्ता के बारे में अवगत कराया। प्रो० रजनीश सिरोही द्वारा गर्दभ के संरक्षण एवं संवर्धन के सुझाव दिये गये। 

कार्यक्रम के संयोजक डा० ए०के०श्रीवास्व, संयुक्त निदेशक मुख्यालय द्वारा अवगत कराया गया कि प्रदेश में 19वीं पशुगणना के अनुसार गर्दभ पशुओं की संख्या 16000 एवं खच्चर पशुओं की संख्या 8859 मात्र है, जिसमें गत पशुगणना के सापेक्ष 70 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस संबंध में पशुपालको को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं से भी अवगत कराया गया। 

तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डा० जयकेश पाण्डेय एवं डा० पियूष त्रिपाठी एवं कार्यक्रम का संचालन डा० नीलम बाला, उप निदेशक मुख्यालय द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के विभिन्न के जनपदों के मुख्य पशुचिकित्साधिकारी एवं गर्दभ पशुपालक उपस्थित रहे।