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क्यों पूजनीय है आगरा का गुरुद्वारा श्री गुरु का ताल साहिब जी ?

क्यों पूजनीय है आगरा का गुरुद्वारा श्री गुरु का ताल साहिब जी ?

गुरुद्वारा श्री गुरु का ताल साहिब जी उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 पर स्थित यह स्थान श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के पवित्र स्थान को चिह्नित करता है।

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने अपने अनुयायियों भाई मति दास जी, भाई सती दास जी, भाई दयाला जी, भाई गुरदित्त जी, भाई उदो जी और भाई जैता जी के साथ श्री आनंदपुर साहिब से यात्रा शुरू की। सैफाबाद (पटियाला), चीका, जींद, रोहतक होते हुए गुरु साहिब आगरा में उचित नक्षत्रों में इस स्थान पर पहुंचे। गुरु साहिब आगरा शहर के बाहर इस स्थान पर रुके जहाँ आजकल गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब स्थित है। गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब, गुरुद्वारा श्री गुरु का ताल साहिब परिसर में ही बाईं ओर स्थित है। वहां हसन अली नाम का गरीब आदमी अपनी बकरियां चराता था। वह हमेशा प्रार्थना करता था कि अगर गुरु साहिब हिंदुओं को बचाने के लिए गिरफ्तारी देने जा रहे हैं तो वह (गुरु साहिब) उसके माध्यम से गिरफ्तारी देकर उसे भी आशीर्वाद दे सकते हैं।

उस समय औरंगजेब ने घोषणा कर दी थी कि जो भी गुरु साहिब के बारे में जानकारी देगा उसे 500 रुपये मिलेंगे। इसलिए गरीब हसन अली ने विचार किया यदि गुरु साहिब उसके माध्यम से गिरफ्तारी देंगे तो उसे वह पैसा मिल जाएगा और इससे उसके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। साथ ही उसकी बेटी की शादी भी हो जाएगी। गुरु साहिब ने उसे एक कीमती अंगूठी बाजार में बेचने के लिए दी और उस पैसे से कुछ मिठाई और भोजन लाने को कहा। गुरु साहिब ने उसे मिठाई और भोजन लाने के लिए शाल भी दिया। हसन अली ने मिठाई की दुकान पर जाकर दुकानदार को अंगूठी दिखाई, दुकानदार को शक हुआ कि उसके पास इतनी कीमती अंगूठी और शॉल कैसे है। दुकानदार ने इसकी सूचना कोतवाली (थाना) में दी। कोतवाल ने हसन अली को गिरफ्तार कर उन बातों के बारे में पूछा। घबराए हसन अली ने पूरी कहानी कोतवाल को बता दी। तब कोतवाल वहां (गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब) गुरु साहिब से मिलने गया और पूछा कि वह कौन है। गुरु साहिब ने निर्भीकता से उसे बताया कि वह तेग बहादुर है। कोतवाल ने तुरंत गुरु साहिब को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें वहां स्थित भोरा साहिब जेल में डाल दिया। (यह स्थान भोरा साहिब, गुरुद्वारा श्री गुरु का ताल साहिब में दरबार साहिब के नीचे स्थित है)। हसन अली को पुरस्कार के रूप में 500 रुपये मिले। गुरु साहिब नौ दिनों तक नजरबंद रहे। उसके बाद गुरु साहिब को कड़ी सुरक्षा के बीच दिल्ली ले जाया गया।