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बिहार उपचुनाव में अस्वस्थ लालू भी नहीं कर पाए 'करिश्मा'

बिहार उपचुनाव में अस्वस्थ लालू भी नहीं कर पाए 'करिश्मा'

पटना: बिहार के 2 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव (Bihar by-election) में पार्टी को मात मिलने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) फिर से दिल्ली चले गए।


लालू प्रसाद भले ही दिल्ली चले गए हों, लेकिन राजद के दोनों विधानसभा क्षेत्रों में पराजित होने के बाद राज्य की सियासत में यह सवाल अब उठने लगा है कि क्या लालू प्रसाद का चुनावी करिश्मा अब चूक गया है? उनके प्रचार के बावजूद उनका प्रयास अब पार्टी को सफलता नहीं दिला सका।


बिहार में दोनों विधानसभा क्षेत्र कुशेश्वरस्थान और तारापुर में राजद को दूसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। कुशेश्वरस्थान में तो राजद लड़ाई में भी नजर नहीं आई, हालांकि तारापुर में राजद ने जदयू को कांटे की टक्कर दी।


इस उपचुनाव में लालू प्रसाद स्वयं प्रचार में पहुंचे लेकिन उनकी पार्टी जीत नहीं दर्ज कर सकी।


कुशेश्वरस्थान में जदयू के अमन भूषण हजारी ने 12695 मतों से राजद प्रत्याशी गणेश भारती को पराजित किया, जबकि तारापुर में जदयू के राजीव कुमार सिंह ने 3819 मतों से राजद के अरुण कुमार साह को हराया।


राजग उम्मीदवारों के लिए स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने तीन सभाएं की थीं जबकि बीमार लालू प्रसाद अपने प्रत्याशी के लिए दो सभाएं की थी। राजद के नेता तेजस्वी यादव दोनों क्षेत्रों में जमकर पसीना बहाया था, लेकिन परिणाम उन्हें निराश किया।


राजद नेता लालू प्रसाद के बिहार आने पर पार्टी के कार्यकर्ता उत्साहित जरूर हुए थे। बिहार की राजनीति में अपनी अलग पहचान के नेता माने जाने वाले लालू प्रसाद अपनी गंवई और बेबाक बोल के लिए मशहूर हैं। चुनावी सभाओं को संबोधित करने का उनका अंदाज भी निराला होता था, जो मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करता था। इस उपचुनाव में हालांकि लालू प्रसाद बीमार थे, फिर भी चुनावी प्रचार किया।


लालू प्रसाद के आने के बाद राजद कार्यकतार्ओं को यह आस जगी थी कि उनका करिश्मा चलेगा।


पत्रकारों ने बुधवार को जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूछा कि उपचुनाव में लालू प्रसाद का मैजिक नहीं चला? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, अब मैजिक कहां चलता है? जनता ने सब बता दिया है। हमारे लिए तो जनता ही सब कुछ है, लेकिन कुछ लोगों के लिए खुद का परिवार ही सब कुछ होता है।


बहरहाल, इस उपचुनाव परिणाम ने बिहार के राजनीतिक दलों को कई संदेश अवश्य दिए हैं।