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नीतीश कुमार और सोनिया गाँधी के फोन कॉल ने बदली बिहार की तस्वीर

नीतीश कुमार और सोनिया गाँधी के फोन कॉल ने बदली बिहार की तस्वीर

आख़िरकार फिर एक बार बीजेपी को बिहार में मात मिली, जी हाँ बिहार में सियासी तस्वीर बदल गई है। नीतीश कुमार को पिछली बार मज़बूरी में बीजेपी का दामन पकड़ कर गठबंधन करना पड़ा था, लेकिन एक बार पुनः बीजेपी से नाता तोड़कर फिर से नीतीश कुमार ने अपने पुराने साथी के साथ मिलकर सरकार बना ली है। 

बिहार में नया महागठबंधन बनाने के बाद नीतीश कुमार ने आठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। इसके अलावा आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को पुनः डिप्टी सीएम की कमान मिली है। विस्वस्त सूत्रों की माने तो  नीतीश कुमार के सोनिया गाँधी को फोन करने के बाद से ही बिहार की जैसे तस्वीर ही बदल गई हो। एएनआई की माने तो ये कॉल नीतीश कुमार की ओर से कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को की गई थी। जिसमें कोविड-19 से संक्रमित सोनिया गांधी से उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ करने के दौरान राजनितिक पटकथा में  बीजेपी की ओर से बनाए जा रहे दबाव की बात कही।

बीजपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ कुछ मतभेदों के चलते नीतीश ने वहाँ से अपना रिश्ता खत्म कर दिया और सियासी सफर के लिए अपने पुराने साथी लालू प्रसाद यादव की आरजेडी पार्टी के साथ पुनः से हाथ मिला लिया।

बीजेपी पर आरोप मढ़ते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि वो उनकी पार्टी को तोड़ने का प्रयास कर रही है, बीजेपी की इस मंशा को भांपते हुए तथा बिहार में एक नया बदलाव के लिए नीतीश  ने सोनिया गांधी से सहयोग की माँग की, जिसके जवाब में सोनिया ने उनको राहुल गांधी से संपर्क करने को  कहा।  जिसपर पर नीतीश ने तेजस्वी यादव को ये जिम्मेदारी देते हुए राहुल गाँधी से संपर्क करने को कहा।

नीतीश कुमार बिहार में बदलाव के लिए इतना बहुमत चाहतें थे कि बीजेपी किसी प्रकार से भी सेंध लगाकर सरकार न गिरा पाए। मौके की नजाकत को देखते हुए समय मिलने पर नीतीश दांव खेल गए, और एकबार फिर से बीजेपी को बिहार से बाहर का रास्ता दिखाते हुए मुख्यमंत्री की कमान संभाली।