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दिल्ली सरकार पांच अक्टूबर से डि-कंपोजर घोल का छिड़काव करने के लिए तैयार है : गोपाल राय

दिल्ली सरकार पांच अक्टूबर से डि-कंपोजर घोल का छिड़काव करने के लिए तैयार है : गोपाल राय

नई दिल्ली। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि दिल्ली के अंदर जाड़े के समय में जो प्रदूषण बढ़ता है, उसमें पराली का एक अहम भूमिका होती है। दिल्ली सरकार, दिल्ली के अंदर वाहन और धूल समेत अन्य कारणों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने पर काम कर रही है। दिल्ली सरकार ने पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए पिछले साल पूसा इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर बायो डि-कंपोजर के घोल का छिड़काव किया था। पिछले बार लगभग दो हजार एकड़ धान के खेत में इसका छिड़काव किया था।

इस बार किसानों की तरफ से घोल के छिड़काव के लिए काफी अधिक मांग आ रही है। इस बार हम लोग 4 हजार एकड़ से अधिक एरिया में इसके छिड़काव की तैयारी कर रहे हैं। आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसका घोल बनाने की प्रक्रिया की शुरूआत की है। पांच अक्टूबर से इसके छिड़काव की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी तैयार हैं। पर्यावरण मंत्री ने एक सवाल पर कहा कि दिल्ली के अंदर बहुत कम पराली होती है।

ज्यादातर पराली पंजाब, हरियाणा और पड़ोसी राज्यों में होती है। इसलिए हमने निवेदन किया है कि जब तक सभी राज्य मिलकर पराली के समाधान की तरफ नहीं बढ़ेंगे, तब तक इसका समाधान करना मुश्किल है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश की सरकारें ने बायो डि-कंपोजर के छिड़काव की शुरूआत करने के लिए एयर क्वालिटी कमीशन से कहा है। मेरा निवेदन है कि दिल्ली की तरह ही, अन्य सरकारें अपने खर्चे पर इसको तैयार कर किसानों के खेतों में छिड़काव कराती हैं, तो ज्यादा सफलता मिलेगी।

अगर सभी पड़ोसी राज्यों में बायो डि-कंपोजर का छिड़काव होता है, तो इस बार दिल्ली में प्रदूषण कम होगा

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि पिछली बार हमने करीब दो हजार एकड़ खेतो में बायो ड़ि-कंपोजर घोल का छिड़काव किया था। पिछली बार की तुलना में इस बार अभी तक दोगुना यानि 4 हजार एकड़ से अधिक खेत में इसका छिड़काव करने की मांग आ चुकी है। अभी आगे भी इसकी मांग आने की उम्मीद है, उसके मद्देनजर भी हम अपनी तैयारी कर रहे हैं। अगर सभी पड़ोसी राज्यों में बायो डि-कंपोजर का छिड़काव होता है, तो दिल्ली में प्रदूषण कम होगा। दिल्ली में हमने इसका प्रयोग किया, तो पराली पूरी तरह से गल गई है किसानों को पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ी है।

साथ ही खेतों की उर्वरक क्षमता भी बढ़ी है। सभी राज्य आगे आकर पराली को गलाने के लिए बायो डि-कंपोजर का छिड़काव करते हैं, तो निश्चित रूप से पराली से निजात मिलेगी और प्रदूषण कम होगा। कृषि विभाग के अधिकारियों के नेतृत्व में 25 लोगों की टीम बनाई गई है, जो गांव-गांव जाकर किसानों से बात कर फार्म भरवा रहे हैं। बायो डि-कंपोजर का घोल बनाने से लेकर खेतों में छिड़काव तक करीब एक हजार रुपए प्रति एकड़ का खर्च आ रहा है। दिल्ली में करीब चार हजार एकड़ खेत में छिड़काव करने में करीब 50 लाख रुपए तक का खर्च आने की उम्मीद है।

पूसा इंस्टीट्यूट ने 10 कंपनियों को कैप्सूल बनाने के दिए लाइसेंस

पूसा इंस्टीट्यूट के बायो डि-कंपोजर प्रबंधन के नोडल अधिकारी इंद्र मनी मिश्र ने बताया कि हमने दस कंपनियों को बायो डि-कंपोजर का कैप्सूल बनाने के लिए लाइसेंस दिया है। पिछले साल की जो सफलता थी, उसे देखकर कई कंपनियां आगे आई हैं। इसके परिणाम से उत्साहित होकर एक कंपनी पंजाब और हरियाणा के 5 लाख एकड़ खेत में इसका छिड़काव करने जा रहे हैं। हरियाणा सरकार से एक लाख एकड़ खेत के लिए बायो डि-कंपोजर की मांग आई है। साथ ही, 75 हजार एकड़ खेत के लिए पंजाब सरकार से आई है। उत्तर प्रदेश सरकार भी इसके परिणाम से उत्साहित होकर 10 लाख एकड़ खेत में इसका प्रयोग करने जा रही है। दिल्ली सरकार द्वारा पिछले साल जो अभियान चलाया गया था, उसकी सफलता को देखकर आसपास के राज्यों में भी बहुत वृहद स्तर पर पूसा इंस्टीट्यूट के बायो डि-कंपोजर घोल का इस्तेमाल करने जा रहे हैं।

बायो डि-कंपोजर घोल बनाने की प्रक्रिया-

150 ग्राम गुड़ लें और 5 लीटर पानी में मिलाएं। सम्पूर्ण मिश्रण को अच्छी तरह से उबालें और उसके बाद उसके ऊपर से सारी गंदगी उतार कर फेंक दें। मिश्रण को एक चौकार बर्तन जैसे ट्रे या टब में ठंडा होने के लिए रख दें। जब मिश्रण हल्का गुनगुना हो जाएगा, तब आप उसमे 50 ग्राम बेसन मिला दें। इसके बाद 4 कैप्सूल को तोड़कर लकड़ी से अच्छी तरह मिला दें। ट्रे या टब को एक समान्य तापमान पर रख दें। ट्रे या टब के ऊपर एक हल्का कपड़ा डाल दें और अब इस मिश्रण को हिलाएं नहीं। दो से तीन दिन के अन्दर एक मलाई जमने लग जाएगी, जो अलग-अलग रंग के दिखाई देंगे। चार दिन के बाद अच्छी मलाई जम जाएगी। इसके बाद दोबारा उसमे 5 लीटर हल्का गरम गुड़ का घोल डालें। बेसन नहीं डालें। हर दो दिन के बाद इस क्रिया को दोहराएं, जब तक  िकवह 25 लीटर बन न आए। जब यह 25 लीटर घोल बन जाए, तो उसको अच्छी तरह से मिलाएं और कल्चर को प्रयोग के लिए तैयार करें।

बायो डि-कंपोजर घोल के प्रयोग विधि-

1- खेल के अंदर (इन सीटू) अपघटन के लिए 10 लीटर पूसा डि-कम्पोजर को 200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ मे नैपसैक स्पेयर द्वारा छिड़काव किया जा सकता है। उसके बाद पराली को रोटावेटर से अच्छी तरह मिला दे और हल्की सिचाई कर दें।

2- गड्ढे, ढेर, विंड्रो में एक टन कृषि अवशेष को खेत के बाहर कम्पोस्ट के लिए 5 लीटर पूसा डि-कम्पोजर का प्रयोग करें।

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