होम > राज्य > दिल्ली

पराली गलाने के लिए खेतों में बायो डि-कंपोजर का छिड़काव आज से, नरेला से शुरूआत

पराली गलाने के लिए खेतों में बायो डि-कंपोजर का छिड़काव आज से, नरेला से शुरूआत

नई दिल्ली। केजरीवाल सरकार दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विंटर एक्शन प्लान के तहत पराली गलाने के लिए सोमवार (11 अक्टूबर) से किसानों के खेतों में निःशुल्क बायो डि-कंपोजर घोल के छिड़काव की शुरूआत करेगी। इस बार सरकार घोल बनाने से लेकर छिड़काव करने तक करीब 50 लाख रुपए खर्च कर रही है।

पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि इस अभियान की शुरूआत नरेला विधानसभा के फतेहपुर जट गांव से की जाएगी। जिन किसानों ने अपने खेत में बायो डि-कंपोजर घोल के छिड़काव की मांग की है, उनके खेतों में सुबह से छिड़काव शुरू कर दिया जाएगा। केजरीवाल सरकार ने इस बार दिल्ली में चार हजार एकड़ से अधिक एरिया में पराली गलाने के लिए इस घोल का छिड़काव करने की तैयारी की हुई है, जबकि पिछले साल करीब दो हजार एकड़ एरिया में ही छिड़काव किया गया था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिल्ली सरकार 24 सितंबर से पूसा इंस्टीट्यूट के सहयोग से खरखरी नाहर में बायो डि-कंपोजर का घोल तैयार करा रही है।

राय ने कहा कि केजरीवाल सरकार ने सभी राज्यों से अपील की है कि दिल्ली सरकार की तरह वे भी पराली गलाने में अपने-अपने किसानों की मदद कर सकते है और बायो डि-कंपोजर के छिड़काव पर आने वाला पूरा खर्च खुद वहन कर सकते हैं। दिल्ली ने बायो डि-कंपोजर के रूप में पराली का समाधान दे दिया है। इसका घोल बनाने से लेकर खेत में छिड़काव करने तक एक हजार रुपए प्रति एकड़ से भी कम खर्च आता है। इसके परिणाम से उत्साहित एयर क्वालिटी कमीशन ने भी अब सभी राज्यों को बायो डि-कंपोजर का इस्तेमाल करने का आदेश दिया है। जब सभी राज्य सरकारें मिलकर पराली के समाधान की तरफ बढ़ेंगी, तभी इसका जड़ से समाधान संभव है।

गौरतलब है कि सरकार ने 24 सितंबर को बायो डि-कंपोजर का घोल बनाने की प्रक्रिया की शुरूआत की थी। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा के सहयोग से खरखरी नाहर में यह घोल तैयार किया जा रहा है। उत्साहित किसान बासमती धान वाले खेतों में भी छिड़काव की मांग कर रहे हैं।

राय ने कहा कि सरकार ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विंटर एक्शन प्लान तैयार किया है। इस प्लान के तहत 10 बिंदुओं पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। इसी प्लान का हिस्सा पराली पर बायो डि-कंपोजर का छिड़काव करना भी है। सरकार ने पराली के समाधान के लिए निःशुल्क बायो डि-कंपोजर का छिड़काव कर न सिर्फ किसानों की मदद कर रही है, बल्कि पराली जलने से होने वाले प्रदूषण को भी खत्म कर रही है। वहीं, पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर पराली जलाई जाती है और उसके धुएं का दिल्ली की हवा पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है। परिणामस्वरूप ठंड के मौसम में दिल्ली का प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच जाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को भी बायो डी-कम्पोज़र से पराली गलाने से संबंधित थर्ड पार्टी ऑडिट रिपोर्टसौंपी है। केंद्र सरकार की एजेंसी वाप्कोस ने बायो डि-कंपोजर के छिड़काव का पराली पर पड़ने वाले प्रभाव का थर्ड पार्टी ऑडिट की थी। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधीन काम करने वाली वाप्कोस एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में बायो डि-कंपोजर को पराली गलाने का एक बेहतर समाधान बताया है। केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से बायो डि-कंपोजर तकनीक को दूसरे राज्यों में भी लागू करने की मांग की गई है।

(मेधज न्यूज़ / श्री राम शॉ)

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन . जानिए देश-विदेशमनोरंजनबॉलीवुडखेल जगतबिज़नेस और अपने प्रदेश, से जुड़ी खबरें।

यह भी पढ़ें- उप्र डेवलपमेण्ट फोरम ने किया मुंबई में रह रहे उप्र के लोगों को जोड़ने के लिए कार्यक्रम का आयोजन

यूपी: उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने किया प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का उद्घाटन

उत्तर प्रदेश में कोरोना पर नियंत्रण, लेकिन प्रशासन मुस्तैद : योगी ने दिए निर्देश

दिल्ली सरकार पांच अक्टूबर से डि-कंपोजर घोल का छिड़काव करने के लिए तैयार है : गोपाल राय


0Comments