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बंदरों को पीड़क जंतु बनाने की मांग पर हिमाचल सरकार को केंद्र की फटकार

बंदरों को पीड़क जंतु बनाने की मांग पर हिमाचल सरकार को केंद्र की फटकार

बदंर, जो हिंदू धर्म में काफी पूजनीय माने जाते है। इन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के प्रिय भक्त हनुमान का रुप मान कर पूजा जाता है। इन बंदरों को हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार ने पीड़क जंतु बनाने का फैसला किया है। वहीं इस फैसले के के खिलाफ अब केंद्र सरकार ने भी हिमाचल सरकार को फटकार लगाई है। 


दरअसल राज्य ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से हिमाचल सरकार ने राज्य में मौजूद बंदरों को पीड़क जानवर घोषित करने का अनुरोध किया था। इस संबंध में पूर्व अधिसूचना के बाद अप्रैल में समाप्त हो गया था। 

बता दें कि एक बार बंदरों को पीड़क की श्रेणी में डाले जाने के बाद वन विभाग उन्हें मार सकता है। इससे फसल की बर्बादी, मनुष्यों के साथ संघर्ष और संपत्ति के नुकसान को रोका जा सकेगा। केंद्र सरकार ने पहली बार 2016 में हिमाचल प्रदेश की 93 तहसीलों में अधिसूचना के जरिए बंदरों को पीड़क घोषित किया था। इसे देखते हुए केंद्र ने कम से कम चार बार बंदरों को मारने की अनुमति दी।


जानकारी के मुताबिक कुल 12 जिलों में से 10 में बंदरों का प्रकोप व्याप्त है। राज्य के 17,794 गावों में से 2300 गांव बुरी तरह से प्रभावित है। आलम ये है कि बंदर फसलों को भी नुकसान पहुंचाते है। वर्ष 2016 में कृषि विभाग ने जंगली जानवरों, विशेष रूप से बंदरों के कारण 184.28 करोड़ रुपये की फसल के नुकसान की सूचना दी।


नवीनतम अनुरोध के बाद, केंद्र ने राज्य से जानकारी मांगी कि कितने बंदरों को उस अवधि के दौरान किसानों द्वारा मार दिया गया। इस अवधि में उन्हें पीड़क की श्रेणी में रखा गया था। इसने ये भी जानना चाहा कि क्या इंसानों पर बंदरों के हमले में बढ़ोरी हुई है या घटी है।


सरकार को फिर से बंदरों को पीड़क घोषित करने के लिए मंत्रालय के समक्ष एक समीक्षा याचिका दायर करनी पड़ी, लेकिन ऐसा नहीं किया जा सका। मीडिया रिोपर्ट्स की मानें तो इस संबंध में वन मंत्री राकेश पठानिया ने कहा कि विभाग ने एक नई समीक्षा याचिका दायर की है और हमें उम्मीद है कि केंद्र फिर से बंदरों को पीड़क घोषित किया है।


स्थानीय मीडिया के अनुसार प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ, वन्य जीव) अजय श्रीवास्व ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय ने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर कई प्रश्न और आपत्तियां जताई है। राज्य सरकार अब इन्हें दूर करने की कोशिश में लगी है। कई कारणों से किसानों द्वारा बंदरों को मारने के मामले दर्ज नहीं किए गए है।


उन्होंने कहा कि क्षेत्र से कुछ डेटा आने का अभी इंतजार है। इसके बाद सरकार को दोबारा से पत्र लिखा जाएगा। मीडिया सोर्स के जरिए उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2020 की जनगणना के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में बंदरों की आबादी 136443 है। 2004 में इनकी आबादी 3.17 लाख से अधिक थी।


वन विभाग बंदरों की आबादी में कमी का श्रेय बंध्याकरण कार्यक्रम को दिया जाता है। वन विभाग के पास मोबाइल इकाइयों के अलावा शिमला, हमीरपुर, कांगड़ा, ऊना, चंबा, सिरमौर और मंडी में आठ बंदर नसबंदी केंद्र है। वर्ष 2006-07 से अब तक इन केंद्रों पर 1.40 लाख से अधिक बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। हिमाचल किसान सभा के अध्यक्ष और पूर्व आईएफएस कुलदीप सिंह तंवर ने हालांकि कहा कि नसबंदी कार्यक्रम अपने उद्देश्य को प्राप्त करने में विफल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य भर में 40 हजार से अधिक बंदरों को मार डाला गया है क्योंकि उन्हें पीड़क घोषित किया गया था, लेकिन इसकी सूचना नहीं दी गई थी।