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सिद्धारमैया ने कर्नाटक में बोम्मई सरकार को आरएसएस की कठपुतली बताया

सिद्धारमैया ने कर्नाटक में बोम्मई सरकार को आरएसएस की कठपुतली बताया

बेंगलुरु | कर्नाटक विधानसभा में मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) लागू करने को लेकर काफी हंगामा हुआ और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (Chief Minister Basavaraj Bommai) पर कांग्रेस के विपक्षी दल के नेता सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने आरएसएस की कठपुतली होने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया की सरकार ने नई शिक्षा नीति को आरएसएस या नागपुर शिक्षा नीति मानते हुए स्वीकार कर लिया।

सदन को स्थगित करने से लगभग एक घंटे पहले कांग्रेस सदस्यों ने हंगामा कर दिया और बिना चर्चा के एनईपी के कार्यान्वयन के लिए सरकार को निशाना बनाया और इसे आरएसएस का एजेंडा बताया।

विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कहा है कि बोम्मई सहित पूरी सरकार आरएसएस की कठपुतली की तरह व्यवहार कर रही है और उनके आदेश पर काम कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को लोकतंत्र और शासन की संसदीय प्रणाली में कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी 2 अक्टूबर से कीमतें कम होने तक मूल्य वृद्धि के खिलाफ राज्यव्यापी विरोध शुरू करेगी।

स्पीकर का पद राजनीति और राजनीतिक दलों से ऊपर होता है। उसके निर्णय हमेशा निष्पक्ष होने चाहिए। उन्होंने कहा कि पोजिशन की पवित्रता क्या है, अगर स्पीकर किसी राजनीतिक दल के सदस्य की तरह व्यवहार करता है।

उन्होंने आरोप लगाया, "नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति उच्च जाति और आरएसएस को हाशिए के वर्गों, दलितों और महिलाओं को गुलाम बनाने में सक्षम बनाने का एक प्रयास है। अगर हम विरोध करने की कोशिश करते हैं, तो स्पीकर सरकार को सही ठहराने के लिए कूद पड़ते हैं।"

सिद्धारमैयार ने कहा भाजपा सरकार ने केआईएडीबी की जमीन को 1.5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की लागत से 175 करोड़ रुपये में 116 एकड़ के अधिग्रहण के लिए सौंपने का फैसला किया है। वही जमीन अब सिर्फ 50 करोड़ रुपये में सेस को दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा बाजार कीमत 300-400 करोड़ रुपये है।

उन्होंने कहा, "नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। केंद्र और राज्य भाजपा दोनों सरकारें आम आदमी से लूट रही हैं। नरेंद्र मोदी सरकार ने डीजल के उत्पाद शुल्क को 3.45 रुपये से बढ़ाकर 31.84 रुपये कर दिया है और पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में 9.21 रुपये से 32.98 रुपये की वृद्धि की गई है। नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले 7 वर्षों में उत्पाद शुल्क के रूप में लगभग 23 लाख करोड़ रुपये इक्ठ्ठे किए हैं।"