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देवभूमि उत्तराखंड में भी गरजेंगे सीएम योगी आदित्यनाथ, स्टार प्रचारक के तौर पर उतरेंगे चुनाव में

देवभूमि उत्तराखंड में भी गरजेंगे सीएम योगी आदित्यनाथ, स्टार प्रचारक के तौर पर उतरेंगे चुनाव में

भाजपा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी उत्तराखंड के चुनावी रण में उतारना चाहती है। वे उत्तराखंड के पौड़ी जिले से आते हैं और देवभूमि के नाम से जाने वाले इस प्रदेश में काफी पॉपुलर हैं। यूपी चुनाव के व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए उन्हें स्टार प्रचारक के तौर पर एक दिन के लिए मैदान में उतारा जा सकता है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि यूपी के बड़े चुनावी अभियान के बीच भाजपा उत्तराखंड के चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। जैसे ही आयोग की ओर से रैलियों व प्रचार को लेकर कोई छूट आती है, वहां प्रधानमंत्री मोदी के साथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और भाजपा के अन्य बड़े नेताओं की ताबड़तोड़ रैलियां रखी जाएंगी। इसका पूरा प्लान तैयार है। सूत्र बताते हैं कि योगी आदित्यनाथ पिथौरागढ़ में रैली करेंगे।

अभी चुनाव आयोग ने देश में चल रही कोरोना की तीसरी लहर के कारण चुनावी रोड शो, रैलियों पर 31 जनवरी तक रोक लगा रखी है। केवल पहले चरण के लिए उम्मीदवारों को कुछ छूट है। इसके तहत वे 28 जनवरी से 8 फरवरी तक 500 लोगों की खुले मैदान में चुनावी सभा कर सकते हैं। आयोग की शर्तों के अनुसार घर-घर प्रचार के नियमों पर भी कई तरह की पाबंदियां हैं। इसके तहत केवल 10 लोग प्रचार करने जा सकेंगे। प्रचार के दौरान जो भी पार्टी कोरोना गाइडलाइन को नहीं मान रही हैं, उन पर आयोग चुनाव आचार संहिता के तहत कार्रवाई कर रहा है।

योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के एक छोटे से गांव पंचूर में हुआ था। उस समय वह हिस्सा उत्तर प्रदेश के ही अंतर्गत आता था। उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी वहीं  हुई थी  वह वहां योगी आदित्यनाथ नहीं बल्कि अजय सिंह बिष्ट के नाम से जाने जाते थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई लिखाई प्राथमिक विध्‍यालय ठंगर में हुई थी। योगी ने यहीं की गढ़वाल यूनिवर्सिटी से गणित में बीएससी की डिग्री ली थी। 90 के दशक में जब राममंदिर आंदोलन चरम पर था, तब योगी आदित्यनाथ की मुलाकात गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ से हुई। फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और संन्यास ले लिया। उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ भी उत्तराखंड के थे। वे भी  राम मंदिर आंदोलन  से जुड़े थे। कालांतर में महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को गोरक्षपीठाधीश्वर के तौर पर अपना उत्तराधिकारी बनाया। पहली बार वर्ष 1998 में योगी ने मात्र 26 वर्ष की उम्र में गोरखपुर से लोकसभा का चुनाव जीता था। उनके नाम सबसे कम उम्र में सांसद बनने का रिकॉर्ड दर्ज है।