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वाराणसी के प्राचीन मंदिरों में से एक दुर्गा मंदिर

वाराणसी के प्राचीन मंदिरों में से एक दुर्गा मंदिर

दुर्गा मंदिर या दुर्गा कुंड मंदिर वाराणसी जंक्शन से 7 किमी की दूरी पर तुलसी मानस मंदिर के पास स्थित वाराणसी का एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। दुर्गा मंदिर को दुर्गा कुंड और लाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह वाराणसी के लोकप्रिय तीर्थ स्थलों में से एक है।

देवी दुर्गा को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में बंगाल की रानी, रानी भवानी ने करवाया था। किंवदंती के अनुसार, मंदिर में मूर्ति मनुष्य द्वारा नहीं बनाई गई है, बल्कि स्वयं प्रकट हुई है। ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा ने कई शताब्दियों से वाराणसी के दक्षिणी छोर की रक्षा की है। मंदिर को बंदर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि मंदिर के आसपास कई बंदरों को देखा जा सकता है।

मंदिर का निर्माण उत्तर भारतीय नागर शैली की वास्तुकला में किया गया था। शक्ति और बल  की देवी, दुर्गा माता की केंद्रीय मूर्ति के रंग से मेल कराने के लिए मंदिर को गेरू से लाल रंग में रंगा गया है। मंदिर में एक साथ जुड़े हुए कई छोटे शिखरों से बने हुए है। मंदिर एक आयताकार तालाब के किनारे पर स्थित है जिसे दुर्गा कुंड कहा जाता है। मंदिर परिसर में देवी लक्ष्मी, सरस्वती और काली की मूर्तियां भी मौजूद हैं।

दुर्गा मंदिर में सभी त्योहार मनाए जाते हैं, खासकर दुर्गा पूजा और नवरात्रि का त्योहार। त्योहार के दिनों में मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण भक्तों के दिल और दिमाग को शांति प्रदान करता है।