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पर्व-त्योहारों पर स्वच्छता, सुरक्षा और सद्भावना को दें सर्वोच्च प्राथमिकता : सीएम योगी

पर्व-त्योहारों पर स्वच्छता, सुरक्षा और सद्भावना को दें सर्वोच्च प्राथमिकता : सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समस्त प्रदेशवासियों को शारदीय नवरात्र की पावन नवमी एवं विजयदशमी (दशहरा) की शुभकामनाएं देते हुए अपील की है कि पर्व-त्योहारों पर स्वच्छता, सुरक्षा और सद्भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। सभी दुर्गा पंडालों, मंदिरों पर सुरक्षा के मानकों का ध्यान रखा जाए। ऐसा करने से पर्वों की प्रासंगिकता और उत्साह, उमंग कई गुना बढ़ जाता है। 

मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में कन्या पूजन के बाद मीडिया से बातचीत में सीएम योगी ने कहा कि सनातन हिंदू धर्म में वर्ष में दो बार नवरात्र (वासंतिक और शारदीय) के पावन पर्व पर समस्त सनातन धर्मावलंबी मातृशक्ति के प्रति सम्मान की सर्वोच्च भावना के साथ पूरी प्रतिबद्धता से जुड़ते हैं। नवमी तिथि पर कन्या पूजन की सनातनी परंपरा मातृशक्ति की महत्ता को रेखांकित करती है। यह केवल धार्मिक-आध्यात्मिक आयोजन नहीं है बल्कि भौतिक जीवन में भी इसकी महत्ता एवं प्रासंगिकता है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वासंतिक नवरात्र की नवमी तिथि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पावन जन्म से जुड़ी है तो शारदीय नवरात्र में नवमी के बाद दशमी की तिथि श्रीराम के विजयोत्सव से। यह पर्व हमें अहर्निश स्मरण कराता है कि सत्य, धर्म और न्याय के पथ पर चलने वालों की सदैव विजय होती है। असत्य, अधर्म और अन्याय कभी शाश्वत नहीं हो सकता। सीएम योगी ने कहा कि पूर्व में दो वर्ष तक कोरोना के चलते आयोजन पर कुछ पाबंदियां रहीं लेकिन मां भगवती की कृपा से कोई विघ्न नहीं आया। अब सदी की सबसे बड़ी महामारी काफी हद तक नियंत्रण में है और पर्व धूमधाम से सामूहिकता के साथ मनाया जा रहा है। 

सीएम योगी ने कहा कि दुर्गा, पूजा एवं विजयदशमी के आयोजन में प्रशासन की तरफ से सुरक्षा व अन्य मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। आयोजनों से जुड़े लोगों को भी इसमें अपनी भागीदारी व जिम्मेदारी निभानी होगी। पूजा समितियों के आयोजक व मंदिरों के प्रबंधक स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा समेत सभी प्रकार के सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए स्वच्छता का भी ध्यान रखें। प्रशासन के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करें कि कहीं कोई अव्यवस्था, भगदड़ की स्थिति न हो। किसी की भी आस्था के साथ खिलवाड़ न हो, पर्व का उत्साह-उमंग कुंद न हो। लोक जीवन में खुशहाली व उमंग कायम होने पर ही सभी लोग विकास से जुड़कर समाज, प्रदेश व देशहित में अपना योगदान दे पाएंगे।