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योगी सरकार की पहल से दोबारा बढ़ रहा है संस्कृत का दबदबा

योगी सरकार की पहल से दोबारा बढ़ रहा है संस्कृत का दबदबा

योगी सरकार की संस्कृत को बढ़ावा देने की पहल रंग लाने लगी है। जहां पहले लोगों का संस्कृत के प्रति रुझान कम हो चुका था, वहीं योगी सरकार की पहल से दोबारा संस्कृत का दबदबा बढ़ने लगा है। मुख्यमंत्री योगी की इस पहल का प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य प्रदेशों के युवा भी लाभ उठा रहे हैं। युवा केवल भाषा के लिए ही नहीं बल्कि नौकरी के लिए भी इसे चुन रहे हैं। प्रदेश में सिविल सेवा में संस्कृत का गौरव दिखने लगा है। योगी सरकार द्वारा संस्कृत साहित्य में संचालित सिविल सेवा नि:शुल्क कोचिंग एवं मार्गदर्शन योजना का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों की सिविल सेवा परीक्षा के विभिन्न चरणों में कुल 61 अभ्यर्थी सफल रहे जबकि 6 अभ्यर्थी का अंतिम रूप से चयन हुआ। 

योगी सरकार द्वारा संचालित यूपी संस्कृत संस्थान के सिविल सेवा नि:शुल्क संस्कृत कोचिंग एवं मार्गदर्शन योजना के कोआर्डिनेटर शीलवंत सिंह ने बताया कि दिसंबर-2019 में योगी सरकार की ओर से संस्कृत साहित्य में संचालित सिविल सेवा नि:शुल्क कोचिंग एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम शुरू किया गया था, ताकि सिविल सेवा में संस्कृत का कद बढ़े। उनकी यह मुहिम रंग भी ला रही है। महज तीन सत्र के दौरान संस्कृत विषय में 61 अभ्यर्थी आगे बढ़ने सफल रहे, जिसमें पहले सत्र में उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों की सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में 8, मुख्य परीक्षा में 4 अभ्यर्थियों और 2 अभ्यर्थियों ने इंटरव्यू में अंतिम रूप से अपना परचम फहराया है। वहीं दूसरे सत्र में सिविल सेवा परीक्षा-21 की प्रारंभिक परीक्षा में 16, मुख्य परीक्षा में 7 और साक्षात्कार में 4 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है। इसके साथ ही तीसरे सत्र में सिविल सेवा परीक्षा-22 की प्रारंभिक परीक्षा में 19, मुख्य परीक्षा में 7 अभ्यर्थी सफल हुए जबकि साक्षात्कार का रिजल्ट अभी आना बाकी है। 

योजना के कोआर्डिनेटर शीलवंत सिंह ने बताया कि सिविल सेवा नि:शुल्क कोचिंग का प्रदेश के छात्र ही नहीं बल्कि देश के अन्य प्रदेश के छात्र भी लाभ उठा रहे हैं। इस संख्या में सत्र दर सत्र बढ़ोत्तरी हो रही है। वर्तमान में कुल संख्या के 20 प्रतिशत छात्र दूसरे प्रदेशों के हैं। इसमें जम्मू कश्मीर के 2, दिल्ली के 6, गुजरात के 5, पश्चिम बंगाल के 2 और हरियाणा के 3 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा केरल, राजस्थान, आंध्रप्रदेश और पंजाब के भी छात्र निःशुल्क कोचिंग का लाभ उठा रहे हैं।  

कोआर्डिनेटर शीलवंत सिंह ने बताया कि प्रदेश में 1 जुलाई से संस्कृत साहित्य में सिविल सेवा की निःशुल्क कोचिंग के चौथे सत्र के आवेदन शुरू हो चुके हैं, जो 15 अगस्त तक चलेंगे। वहीं, आवेदन की तारीख एक हफ्ते और आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। मालूम हो कि पूरा सत्र 10 माह का होता है, जिसमें प्रशिक्षण तीन चरणों में पूरा किया जाता है। विशेषज्ञों की ओर से इसमें व्याकरण,  भाषाशास्त्र, दर्शन, महाकाव्य, संस्कृत नाट्यशास्त्र, संस्कृत गद्य एवं पद्य आदि की पढ़ाई कराई जाती है। यूजीसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक या फिर समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके 21 से 35 वर्ष के सभी वर्ग के अभ्यर्थी इस योजना के पात्र हो सकते हैं।

वंचित वर्ग के लिए यह योजना वरदान है क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वह उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा नहीं दे पाते हैं। ऐसे में वंचित वर्ग के छात्र इस योजना का लाभ उठा कर निःशुल्क पाठ्यक्रम, डिजिटल लाइब्रेरी, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की टेस्ट सीरिज और साक्षात्कार का मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। संस्कृत भाषा से जुड़कर मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं अपनी मातृभाषा से सीधे जुड़ गया हूं।  
मनीष कुमार, वरिष्ठ डायट प्रवक्ता, बेसिक शिक्षा विभाग

निःशुल्क संस्कृत की कोचिंग में दाखिला लेने से ही मेरा सिविल परीक्षा में सेलेक्शन हुआ है। वहां दिल्ली विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर के मार्गदर्शन से ही परीक्षा पास की। योगी सरकार के प्रयास से एक बार फिर से सिविल सेवा परीक्षा में संस्कृत साहित्य मेन स्ट्रीम में आ गयी है। यह योजना मेरे जैसे हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है। इस योजना से आज का यूथ संस्कृत साहित्य से कनेक्ट हो रहा है।
 वेद प्रकाश सिंह, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी