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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनान्तर्गत हेतु ऑनलाईन आवेदन की प्रक्रिया कल से हुई शुरू

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनान्तर्गत हेतु ऑनलाईन आवेदन की प्रक्रिया कल से हुई शुरू

उत्तर प्रदेश के मत्स्य विकास कैबिनेट मंत्री डॉ0 संजय कुमार निषाद ने मुख्य भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के पोर्टल पर आवेदन आमंत्रित किये जाने की प्रक्रिया का शुभारम्भ किया।

उन्होंने प्रदेश के सभी मण्डलीय एवं जनपदीय मत्स्य अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अपने मण्डलों में 01 जुलाई से 15 जुलाई, 2022 तक प्रवास करें और मत्स्य विभाग के पोर्टल पर अधिक से अधिक लाभार्थियों को आवेदन करायें। जिला स्तरीय शिक्षण कार्यक्रम में मत्स्य पालकों और कृषकों को जागरूक करें, ताकि बड़ी संख्या में लोग वित्तीय सहायता प्राप्त कर योजना का लाभ उठा सकें।

इस अवसर पर आयोजित प्रेसवार्ता में में डा0 निषाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजनान्तर्गत वर्ष 2022-23 के लिए विभिन्न मात्स्यिकी परियोजनाओं अन्तर्गत विभागीय आनलाइन पोर्टल http://fymis.upsdc.gov.in पर आवेदन आज से प्रारम्भ कर दिया गया है। आवेदन करने की तिथि 01 जुलाई से 15 जुलाई है। योजनान्तर्गत परियोजनाओं का विवरण, इकाई लागत आवेदन करने की प्रक्रिया, आवेदन के साथ संलग्न किये जाने वाले अभिलेख व विस्तुत विवरण विज्ञापन विभागीय पोर्टल http://fymis.upsdc.gov.in एवं विभागीय वेबासाइट http://fisheries.upsdc.gov.in पर देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नम्बर 18001805661 पर जानकारी की जा सकती है।

डॉ0 निषाद ने बताया कि योजना के तहत संचालित होने वाली 25 गतिविधियों हेतु ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। वित्तीय लाभ /अनुदान (एस.सी/एस.टी, महिलाओं के लिए परियोजना लागत का 60 प्रतिशत यानी दस हजार में  6 हजार और सभी वर्ग के पुरुषों को 40 प्रतिशत यानी 10 हजार मे 4 हजार लेने हेतु) ऑनलाईन आवेदन लिया जा रहा है। महिलाओं और अनुसूचित जाति के लिए 60 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है। पुरूष एवं सामान्य श्रेणी के लिए 40 प्रतिशत है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में उत्पादन और क्रय-विक्रय से संबंधि जानकारी देने हेतु मत्स्य विभाग द्वारा 50-50 के बैच का जिला स्तर पर निःशुल्क शिक्षण प्रशिक्षण का कार्यक्रम दिनांक 01 जुलाई, 2022 से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें बिंदुवार योजनाओं के बारे में, योजनाओं की पात्रता के बारे में, किसान क्रेडिट कार्ड के बारे में, उनके अहर्ता, नियम एवं शर्तों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

योजना में मुख्य रूप से तालाब निर्माण, मछली पालन मे होने वाला व्यय, खारे जल में तालाब निर्माण, मछली पालन मे होने वाला व्यय, मत्स्य बीज हैचरी की स्थापना, बायोफ्लाक टैंक , विभिन्न श्रेणी के बड़े, माध्यम और छोटे आकार के आर०ए०एस० एवं बायोफ्लाक, विभिन्न श्रेणी की फिश फीड मिल, साइकिल आइस बाक्स के साथ, मोटर साइकिल आइस बाक्स के साथ, थ्री व्हिलर आइस बाक्स के साथ, इन्सुलेटेड वाहन, रेफ्रीजिरेटेड वाहन, मत्स्य बीज नर्सरी, घर के आगे पीछे छोटे तालाब, मनोरंजन युक्त तालाब, जिंदा मछली विक्रय केंद्र, केज कल्चर आदि परियोजनाएं प्रमुख हैं। इच्छुक व्यक्ति अपनी इच्छानुसार परियोजनाओं का चयन करते हुए निर्धारित समयावधि के अन्दर वित्तीय सहायता हेतु आनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

किसान क्रेडिट कार्ड की आर०बी०आई की नई गाइडलाइन है, जिसमें किसी मत्स्य पालक के पास जाल या नाव हो, छोटे या बड़े पोखरे हों, मत्स्य पालन के क्षेत्र और क्रय -विक्रय से संबंधित प्रमाणिक दस्तावेज बैंक में जमा करने पर किसान क्रेडिट कार्ड जो फिशरीज क्रेडिट कार्ड का स्वरूप धारित करता है, बैंक 01 लाख 60 हजार क्रेडिट लिमिट के साथ बिना किसी कोलेटरल गारन्टी के व्यवसाय करने की अनुमति देता है। जानकारी के आभाव में मछुआ समुदाय किसान क्रेडिट कार्ड से वंचित हैं इस लिए व्यवसाय नहीं कर पा रहा है और मछुआ दुर्घटना बीमा (निःशुल्क) का लाभ भी नहीं प्राप्त कर पाते हैं। प्रशिक्षण में विस्तार से जानकारी दी जाएगी कि निःशुल्क दुर्घटना बीमा का लाभ प्राप्त करने के लिए केवल 02 प्रपत्र, आधार कार्ड और बैंक विवरण देकर प्राप्त किया जा सकता है। मछुआ दुर्घटना बीमा में मृत्यु होने पर 5.00 लाख रूपए नॉमिनी को, पूर्ण अपंगता की दशा में लाभार्थी को 05 लाख रूपए की धनराशि, आंशिक अपंगता की दशा में 2.5 लाख रूपए और दुर्घटना होने पर हॉस्पिटल में भर्ती होने पर 25000/- रूपए का राहत लाभ विभाग के द्वारा प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान निःशुल्क तालाब की मिट्टी और पानी  जांच के नमूने प्राप्त किये जाएंगे।

मत्स्य पालन के क्षेत्र से जुड़े हुए किसानों के कल्याण के लिए मंत्री संजय कुमार निषाद ने अपील करते हुए कहा है अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठाएं। अलग-अलग योजनाओं के लिए अलग-अलग अर्हतायें हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की मान्यता है कि धन की देवी लक्ष्मी कमल पर विराजमान होती है कमल पानी में होता है।

इसका मतलब धन देवी लक्ष्मी पानी में हैं। लाभार्थी को चाहिए कि अपनी क्षमता और योग्यता के अनुसार योजना का चयन का लाभ लें और आय में वृद्धि करें। उन्होंनें सभी शिक्षित-अशिक्षित लोगों से अपील की है कि मत्स्य पालन के क्षेत्र में विभाग से, विभाग की वेबसाइट से, पोर्टल से, विभागीय अधिकारियों से जनपद के, मंडल के अधिकारियों से संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर मत्स्य पालन के क्षेत्र में आयें, रोजगार पायें, पोष्टिक भोजन का उत्पादन करें, आत्मनिर्भर बने और राजस्व की वृद्धि करें।