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प्राइवेट जेट से सैंडल मंगवाने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती का आज है जन्मदिन

प्राइवेट जेट से सैंडल मंगवाने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती का आज है जन्मदिन

बुहजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मायावती का आज जन्मदिन है। बसपा उनका जन्मदिन जन कल्याणकारी दिवस के रूप में मनाने की तैयारी में है। 15 जनवरी 1956 को जन्मी मायावती ने कभी आईएस बनने का सपना देखा था। उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली, लेकिन वह राज्य की दलित महिला मुख्यमंत्री बनने में जरूर सफल हुईं।

मायावती की जीवनी लिखने वाले लेखक अजय बोस ने की अपनी किताब ‘बहनजी- बायोग्राफी ऑफ मायावती’ में दावा किया है कि यूपी में मुख्यमंत्री का पद हासिल करने वाली उत्तर प्रदेश की दलित मुख्यमंत्री मायावती को घर में ही भेदभाव का सामना करना पड़ा था। यह भेदभाव उनके दलित होने पर नहीं, बल्कि लड़की होने के लिए किया गया था और करने वाले उनके ही पिता थे। छह भाईयों और तीन बहनों वाले उनके परिवार में सभी बहनों को भेदभाव का सामना करना पड़ा। जहां उनके सभी भाईयों की पढ़ाई पब्लिक स्कूलों में हुई, वहीं सभी बहनों का दाखिला सस्ते सरकारी स्कूल में करवाया गया।

मायावती अपने सभी भाई बहनों में पढ़ने में सबसे तेज थीं। उन्होंने आईएस बनने का सपना देखा था। राजनीति में आने से पहले उन्होंने बच्चों को पढ़ाने का भी काम किया। वह दिल्ली में जेजे कॉलोनी के एक स्कूल में पढ़ाती थीं। स्कूल की नौकरी के बाद जो समय बचता था उसे वह यूपीएससी की तैयारी में लगाती थीं। लेकिन, उनके जीवन में तब एक बड़ा बदलाव आया जब कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया। मायावती उनकी विचारधारा से काफी प्रभावित हुईं। इसके बाद उन्होंने आईएएस बनने को अपने सपने को छोड़ दिया और राजनीति में कूद गई।

प्राइवेट जेट से मंगवाती थीं सैंडल?
मायावती का यह कार्यकाल विवादों से भी भरा रहा। उनपर टिकट बेचने के तो आरोप लगे है साथ ही यह भी कहा गया कि उन्होंने प्राइवेट जेट भेजकर मुंबई से अपने लिए सैंडल मंगवाए। आस्ट्रेलियन इंटरनेट एक्टिविस्ट जूलियन असांजे की वेबसाइट विकीलीक्स ने 2011 में मायावती को लेकर कई खुलासे किए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्होंने घर से दफ्तर जाने के लिए विशेष सड़क बनवाए। साथ ही पंसदीदा ब्रांड के चप्पल मंगवाने के लिए सरकारी विमान को लखनऊ से मुंबई भेजने के भी आरोप लगे थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि सैंडल की कीमत को सिर्फ एक हजार होती थी, लेकिन उसे लाने के लिए दस लाख खर्च किए जाते थे।