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महाभारत में शकुनि के पासो का रहस्य, आपको भी कर देगा हैरान

महाभारत में शकुनि के पासो का रहस्य, आपको भी कर देगा हैरान

महाभारत में शकुनि के पासे का रहष्य 

शकुनि महाभारत में सबसे नकारात्मक पात्रों में से एक के रूप में दर्शया गया है, कुरुक्षेत्र युद्ध के पीछे की योजना बनाने वाला मास्टरमाइंड शकुनि को ही कहा जाता हैं, जिसके पासा फेंकने से पांडवों को बड़ी ही मुश्किलो का सामना करना पड़ा। शकुनि, महाभारत का ऐसा पात्र था। जिसने कौरवों और पांडवों के बीच नफरत का जहर घोल कर भाई-भाई को दुश्मन बना दिया था। उसकी बस एक ही मंशा थी, वह ये कि उसकी बहन गांधारी का पुत्र दुर्योधन हस्तिनापुर का राजा बने।

शकुनी ने कुरुक्षेत्र युद्ध के पहले एक योजना बनाई जिसमे उसने पांडवो को जुआ खेलने के लिया आमंत्रित किया जिसमे पांडवो ने कुछ पैसे और गहने दांव पर लगा दिए । जिसके बाद पासा लुढ़का और जो -जो पड़ावों ने लगाया वो - वो शकुनि ने जीत लिया। इस प्रकार खेल आगे बढ़ता गया, हर बार शकुनि अपने जादुई पासों के साथ अपेक्षित संख्या लेकर आता था।

अस्थियों की राख से बने पासे

ऐसी मान्यता है कि शकुनि के पिता ने उससे कहा कि उसकी मौत के पश्चात उनकी अस्थियों की राख से वह एक पासे का निर्माण करे। यह पासा सिर्फ शकुनि के कहे अनुसार काम करेगा और इसकी सहायता से वह कुरुवंश का विनाश कर पाएगा।शकुनि के पासे में उसके पिता की आत्मा वास कर गई थी जिसकी वजह से वह पासा शकुनि की ही बात मानता था। कहते हैं कि शकुनि के पिता ने मरने से पहले शकुनी से कहा था कि मेरे मरने के बाद मेरी रीढ़ की हड्डियों से पासा बनाना, ये पासे हमेशा तुम्हारी आज्ञा मानेंगे, तुमको जुए में कोई हरा नहीं सकेगा।शकुनि किसी भी तरह दुर्योधन को हस्तिनापुर का राजा बनते देखना चाहता था ताकि उसका दुर्योधन पर मानसिक आधिपत्य रहे और वह इस मुर्ख दुर्योधन की सहायता से भीष्म और कुरुकुल का विनाश कर सके तथा उसने ही पांडवो के प्रति दुर्योधन के मन में वैर भाव जगाया था।