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क्या है रामसर समझौता और कितने हैं उत्तर प्रदेश में रामसर स्थल आइए जाने

क्या है रामसर समझौता और कितने हैं उत्तर प्रदेश में रामसर स्थल आइए जाने

रामसर समझौता एक अंतररष्ट्रीय समझौता है जो आर्द्रभूमियों तथा उनके संसाधनों का संरक्षण करने को सुनिश्चित करने के लिए की गई संधि है, यह समझौता 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में हुआ था, रामसर में होने के कारण इसका नाम रामसर समझौता पड़ा, रामसर समझौते में ये तय हुआ कि ऐसा स्थान जहाँ पर एक वर्ष में कम से कम आठ महीने पानी भरा रहेगा वहीं रामसर साइट घोषित की जा सकती है। 

पृथ्वी की आर्द्रभूमियों के महत्त्व की भूमिका की जागरूकता को बढ़ने के लिए प्रति वर्ष 2 फरवरी  को 'विश्व आर्द्रभूमि दिवस' मनाया जाता है, भारत में आर्द्रभूमि के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय नोडल मंत्रालय के रूप में कार्य करता है, भारत के कुल भूमि में से 4.7 प्रतिशत आर्द्रभूमि का है, भारत में अभी तक 49 रामसर स्थल हैं, 2 फ़रवरी 2022 को दो नए रामसर स्थल जोड़े गए है जिनमे 48वां खिजाड़िया पक्षी अभ्यारण्य गुजरात में तथा 49वां बखीरा वन्यजीव अभ्यारण्य उत्तर प्रदेश में स्थित हैं।
 
उत्तर प्रदेश में 10 रामसर स्थल हैं जिसमे पहला ऊपरी गंगा नदी रामसर स्थल है तथा अन्य में साण्डी पक्षी अभयारण्य हरदोई, समसपुर पक्षी अभयारण्य रायबरेली, नवाबगंज पक्षी अभयारण्य उन्नाव, समन पक्षी अभयारण्य मैनपुरी, पार्वती अरगा पक्षी अभयारण्य गोंडा, सरसई नावर झील इटावा, सुर सरोवर कीथम झील आगरा, हैदरपूर बिजनौर, बखीरा वन्यजीव अभ्यारण्य संत कबीर नगर में स्थित हैं।