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कटने के बाद आखिर कहां गया था भगवान गणेश का असली मस्तक, जानें

कटने के बाद आखिर कहां गया था भगवान गणेश का असली मस्तक, जानें

किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा करना आवश्यक माना जाता है। विघ्नहर्ता गणेश भगवान को लेकर कई सारी पौराणिक कहानियां मौजूद हैं, इनमें से एक का जिक्र हम आपके सामने करने जा रहे हैं। यह कहानी उनके मस्तक से जुड़ा हुआ है। 


हम सभी यह जानते हैं कि भगवान गणेश का असली मस्तक कटा हुआ है और इसकी जगह हाथी का सिर लगाया हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनका असली मस्तक कहां है?


श‍िव पुराण के अनुसार, माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से बालक का पुतला बनाकर उसमें प्राण फूंक दिए थे। उस बच्‍चे को किसी को भी अंदर न आने देने का आदेश देते हुए वह स्नान करने चली गईं। कुछ देर बाद वहां भगवान शंकर आए और पार्वती के भवन में जाने लगे। बाल गणेश ने महादेव को अंदर जाने से रोक दिया।


श‍िव जी के लाख समझाने पर भी गणेश नहीं माने। अब इससे शिव जी को गुस्सा आया, क्रोध‍ित होकर महादेव ने अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर भीतर चले गए। पार्वती को जब गणेश के वध के बारे में पता चला, तो वह विलाप करने लगीं और इससे पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया।


इसके बाद माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सिर काट कर बालक के धड़ से जोड़ दिया। 


दूसरी कथा के अनुसार, जब गणपति का जन्‍म हुआ, तो श‍िवलोक में उत्‍सव का माहौल था। सभी देवता नन्‍हें बालक को आशीर्वाद देने के लिए श‍िवधाम पधारे हुए थे, लेकिन शनि देव गणपति को देखे बिना ही विदा लेने लगे। यह देख माता पार्वती ने शनि देव से इसका कारण पूछा। शनि देव ने इसके जवाब में कहा कि अगर उनकी दृष्‍टि गणेश पर पड़ी, तो अमंगल हो जाएगा। लेकिन मां पार्वती नहीं मानी और उन्‍हें गणेश को देखने का आदेश दे दिया। फिर जैसे ही शनि ने गणेश को देखा, उनका सिर कटकर हवा में विलीन हो गया। गणपति जमीन पर गिर गए और उन्हें देख मां पार्वती बेहोश हो गईं। इसके बाद भगवान विष्‍णु ने एक नवजात हाथी का सिर काटकर गणेश जी के धड़ से जोड़ दिया।


मान्यता है कि भगवान शिव ने गणेश जी के असली मस्‍तक को धड़ से अलग कर उसे एक गुफा में रख दिया था। इस गुफा को पाताल भुवनेश्‍वर के नाम से जाना जाता है। कलयुग में इस गुफा की खोज आदिशंकराचार्य ने की थी। इस गुफा में विराजित गणेशजी की मूर्ति को आदि गणेश कहा जाता है। उत्तराखंड में पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर स्थित इस गुफा में रखे गणेश के कटे हुए सिर की रक्षा स्‍वयं भगवान श‍िव करते हैं।



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