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क्यों है विघ्नहर्ता गणेश को सबसे प्रिय मोदक

क्यों है विघ्नहर्ता गणेश को सबसे प्रिय मोदक

मुंबई | हिन्दू धर्म में भगवान् गणेश प्रथम पूजनीय, यानि की किसी भी पूजा या विशेष कार्य से पहले भगवान् गणेश की पूजा की जाती है।  भगवान् गणेश को विघ्नहर्ता, और सुखकर्ता भी कहा जाता है।  जैसे कोई भी पूजा भगवान् गणेशके बिना पूरी नहीं होती ठीक उसी तरह से भगवान् गणेशकी पूजा मोदक यानि के लड्ड़ओं के बिना पूरी नहीं होती।  मोदक भगवांगनेश का प्रिये भोग माना जाता है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है की गणपति को ये मोदक क्यों इतना पसंद है। मोदक एक मराठी शब्द है जिसका अर्थ है आनंद देने वाला, यानि मोदक अध्यात्म और मोक्ष की और ले जाने वाला है। शायद इसी कारण ममोदक भगवान् गणेश को इतना प्रिये है। भगवान् गणेश मोदक का भोग लगा कर जिस आनंद की अनुभूति करते हैं उनके भक्त भी ठीक उसी आनंद में विलीन होकर सुख के सागर में डूबने की इच्छा रखते हैं। 

गणपति बाप्पा को विघ्नहर्ता यूं ही नही कहा जाता, दरअसल किसी भी पूजा, आराधना, अनुष्ठान या मांगलिक कार्य में कोई विघ्न या बाधा न आए इसके लेया सबसे पहले डिवॉन के देव से आराधना किये जाने का प्रावधान है। इसके लिए सर्व प्रथम उनका आह्वाहन किया जाता है और कार्य के पूरा होते ही भगवान् को उनका प्रिय भोग मोदक तथा लड्डू का भोग चढ़ाया जाता है। 

इस प्रथा के पीछे कई हिन्दू धर्म में कई कथाएं है। उन्हीं में से एक कथा के अनुसार गणेश पुराण में देवताओं ने अमृत से बना एक मोदक देवी पार्वती को भेंट किया। गणेशजी ने जब माता पार्वती से मोदक के गुणों के बारे में जाना तो उन्हें उसे खाने की इच्छा और बलवती हो गई। ऐसे में उन्होंने प्रथम पूज्य बनकर मोदक प्राप्त कर लिया तथा उसे खाकर अपार संतुष्टि प्राप्त की। और तभी से मोदक भगवान गणेश का प्रिय हो गया।

एक और कथा के अनुसार एक बार जब भगवान् गणेश परशुराम से युद्ध कर रहे थे, तभी उनका एक दांत टूट गया। जिसके बाद से उन्‍हें कुछ भी खाने में परेशानी होने लगी। तभी उनके लिए एक मोदक तैयार किया गया जिसे आराम से खाया जा सकता था और खाने के बाद उसका मीठा स्वाद मन को आनंदित कर देता था। बस फिर क्या था उसके बाद से ही मोदक भगवान का प्रिय आहार बन गया।  

मोदक को बनाने की कई विधियां हैं जो अलग अलग प्रान्त और संस्कृतियों के हिसाब से अलग अलग हैं।  मोदक चावल के आटे, घी, मैदा, बेसन, मावा, गुड़, सूखे मेवे, नारियल आदि से बनाया जाता है।इसमें पड़ने वाली सभी चीजें  स्वास्थय के हिसाब से  भी बेहद लाभकारी होती हैं।  

भगवान् गणश की पूजा पूरे विश्व में की जाती है।  गणेशजी की मूर्तियां ईरान, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल, कंबोडिया, वियतनाम, चीन, जापान इंडोनेशिया, बुल्गारिया, मैक्सिको और अमेरिका तक में देखने को मिलती हैं। यूरोप के कई देशों में सफल बिजनेसमैन, लेखक, र्आिटस्ट अपने कार्यस्थल तथा घरों में गणेशजी को सर्वप्रथम मानते है। 

शास्त्रों के अनुसार गणपति जी सदा खुश रहने वाले देवता माने गए हैं और मोदक शब्द का अर्थ भी होता है ख़ुशी देने वाला, इसी लिए भगवान् को और उनके भक्तों को मोदक इतना प्रिये है।  ऐसा माना जाता है की वे भक्‍त जो गणेश जी को मोदक का भोग लगाते हैं उन्‍हें जीवन की समस्त कठिनाईओं से मुक्ति मिलती है और सफलता उनके कदम चूमती है।

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