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यह है देश की पहली महिला ट्रक मैकेनिक, मिनटों में ठीक कर देती है भारी—भरकम टायर

यह है देश की पहली महिला ट्रक मैकेनिक, मिनटों में ठीक कर देती है भारी—भरकम टायर

अब वह जमाना नहीं रहा कि महिलाएं सिर्फ घर के काम ही निपटाती हैं। परिवार और बच्चों को संभालने के साथ—साथ वह बाहर के कामों में भी पुरुषों के साथ बढ़—चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। आपने महिलाओं को ऑटो रिक्शा चलाने से लेकर दुकान में बैठकर सामान बेचने तक सहित कई कामों में शामिल होते देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी किसी महिला को एक ट्रक मैकेनिक के रूप में देखा है? शायद ही आपका जवाब हां होगा। हालांकि आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जो लगभग 20 सालों से नेशनल हाईवे 4 पर लगे संजय गांधी नगर ट्रांसपोर्ट डिपो (आजादपुर मंडी) में पंक्चर ठीक कर रही हैं।


60 साल की शांति देवी (Shanti Devi) शायद ऐसी पहली महिला हैं, जो एक ट्रक मैकेनिक के रूप में काम कर रही हैं। रोज करीबन 12 घंटे तक काम करने वाली शांति देवी बड़े—बड़े ट्रकों के टायर्स भी पलक—झपकते ही बदल देती हैं। 


शांति देवी हर रोज 10 से 15 टायरों के पंक्चर ठीक करती हैं। इतना ही नहीं, वह वजनदार लगभग 50 किलो के टायर को भी आराम से उठा लेती हैं। उन्हें यह सब कुछ इतनी शिद्दत से करते देख हट्टे—कट्टे नौजवान सोच में पड़ जाते हैं। 


आज अपने काम में प्रतिष्ठित शांति देवी के लिए कभी यह सफर इतना आसान नहीं रहा। जब से उन्होंने होश संभाला है, पेट पालने के लिए मजदूरी कर रही हैं। आगे चलकर दिल्ली के संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में चाय की छोटी सी दुकान लगाई, लेकिन इससे उनकी कोई खास कमाई नहीं होती थी।


उनकी इस दुकान के आसपास ट्रक और दूसरी गाड़ियों की मरम्मत करने वाले गराज थे। पति से प्रोत्साहन मिला, तो वह धीरे-धीरे इस पेशे में आ गईं। 


बतौर शांति देवी, चाय की दुकान पर वह दिन भर में बमुश्किल 250 से 300 रुपये ही कमा पाती थीं, वहीं पंचर की दुकान पर काम कर वह हर दिन 1000 रुपये तक कमा लेती हैं।


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