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पेड़ों की जड़ों से बना है पुल, भारत में है 180 साल पुराना पुल

पेड़ों की जड़ों से बना है पुल, भारत में है 180 साल पुराना पुल

दुनिया में कई ऐले पुल हैं जो इंसानों के द्वारा बनाए गए है। कुछ खूबसूरत है तो कुछ पुल ऐसे हैं जो अपने आप ही अस्तित्व में आ गए है। कई पुल ऐसे हैं जिनसे कई शहरों को पहचान मिली है जैसे कोलकाता का हावड़ा ब्रिज या सिडनी का हार्बर ब्रिज। 


भारत में भी ऐसे ब्रिज हैं जो काफी अद्भुत है। इन पुल को देखकर काफी मजा आएगा। ऐसा ही एक पुल है मेघालय में। ये पुल इसलिए खास है क्योंकि पेड़ की जड़ों से मिलकर बना हुआ है।


मेघालय में स्थित ये अद्भुत पेड़ जड़ों से बना हुआ है। खास बात है कि सालों बाद भी ये पुल बहुत मजबूती के साथ टिका हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ये पुल 180 साल पुराना है। इसकी खासियत है कि ये पुल पेड़ों की जिंदा जड़ों से बनाया गया था। 


जनजातियों द्वारा है निर्मित


आमतौर पर आज के समय में पुलों का निर्माण इंजीनियरों द्वारा किया जाता है मगर 180 साल पुराने इस पुल का निर्माण खासी और जयंतिया जनजाति के द्वारा किया गया था। ये पुल किसी मशीन से नहीं बल्कि हाथों से बनाया गया था। इस पुल की मजबूती आज भी इतनी अधिक है कि इसपर एक साथ 50 लोग आराम से चल सकते है। 


यूनेस्को ने घोषित किया है हेरिटेज साइट


ये पुल सिर्फ 180 साल पुराना, जनजातियों द्वारा रबर के पेड़ों जड़ों से ही निर्मित नहीं है। इसकी एक खासियत है कि पुल के निर्माण में लगभग 10 से 15 सालों का समय लगता है क्योंकि जड़ों को सही शेप लेने में इतना वक्त लगता है।


वहीं जब ये जड़ों सही शेप में आ जाती हैं तो ये कम से कमल 500 वर्षों तक मजबूती से बनी रहती है। इस पुल की कई विशेषताओं के काऱण यूनेस्कों ने भी इसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट माना है।