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इस गांव में अकेला रहता है व्यक्ति, ऐसे जी रहा है जीवन

इस गांव में अकेला रहता है व्यक्ति, ऐसे जी रहा है जीवन

जीवन जीने के लिए किसी ना किसी की जरूरत अवश्य ही पड़ी है। घर पर, समाज में, शहर में रहने के लिए कई लोगों की आवश्यकता होती है। मगर अगर किसी व्यक्ति को अकेले रहने को कहा जाए तो ऐसा जीवन जीने की कल्पना करना भी मुश्किल है।

 

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी से अलग एक गांव ऐसा भी है जहां कई लोग नहीं बल्कि सिर्फ एक व्यक्ति ही रहता है। ये गांव है रूस की सीमा पर बसा डोबरुसा गांव। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सोवियत संघ के टूटने के बाद लोग इस गांव को छोड़कर अन्य जगहों पर चले गए। 


कुछ सालों बाद इस गांव में मात्र तीन लोग ही बचे थे, इसमें एक दंपत्ति जेना और लिडा थे, जिनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद इस गांव में सिर्फ एक ही व्यक्ति बचा है, जिसका नाम है गरीसा मुनटेन।


अकेले रहता है गांव में


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गांव में तीन दशक पहले तक 200 लोग रहते थे। अब ये गांव सिर्फ एक ही व्यक्ति से आबाद है। इस गांव में लोग भले ही ना रहते हों मगर गरीसा मुनटेन के साथ यहां पांच कुत्ते, नौ टर्की पक्षी, दो बिल्लियां, 42 मुर्गियां, 120 बत्तखें 50 कबूतर और कई हजारों मधुमक्खियां भी रहती है। 


मीडिया से बात करते हुए 65 वर्षीय गरीसा ने कहा कि किसी समय में उनके गांव में 50 घरे थे। जब सोवियत संघ टूटा तो सभी लोग आसपास के गावों और शहरों में बसने चले गए। शुरुआत में उन्हें अकेलेपन से निपटने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा।


उन्होंने बताया कि अकेलापन उन्हें काफी परेशान करता था। मगर उससे दूर होने के लिए उन्होंने खास तरीका अपनाया। उन्होंने बताया कि पहले गांव की अन्य दिशा में जेना और लिंडा रहते थे। तीनों मिलकर काफी बातें भी किया करते थे। मगर उन दोनों की मौत के बाद वो अकेले रह गए है।