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गणपति विसर्जन करने के अभी ये हैं शुभ मुहूर्त, सुबह तक कर सकते है विसर्जन, देखे यहां

गणपति विसर्जन करने के अभी ये हैं शुभ मुहूर्त, सुबह तक कर सकते है विसर्जन, देखे यहां

अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को पड़ने वाली इस तिथि पर ही गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना का भी विशेष महत्व है।


हिंदू धर्म ग्रंथों में तो अनंत चतुर्थी का दिन विष्णु भगवान को समर्पित बताया गया है। इस दिन ही गणेश विसर्जन किया जाता है। इस दिन भक्त खुशियों में झूमते हुए ढोल, नगाड़ों और बाजे के साथ बप्पा को इस मंगल कामना के साथ विसर्जित करते हैं कि वो अगले वर्ष दोबारा पधारेंगे। शहरों, गलियों हर जगह गणपति बप्पा के जयकारों से गूंज उठती है।


गणपति विसर्जन के दौरान बप्पा को नदी, समुद्र या तालाब में विसर्जित किया जाता है। मगर अब पर्यावरण की सुरक्षा को देखते हुए लोग घर में कुंड स्थापित कर विसर्जन करने लगे है। माना जाता है कि बप्पा जाते समय भक्तों के संकट व दुख ले जाते है और अगले वर्ष ढेरों खुशियां लाते है। 


ये है विसर्जन का शुभ मुहूर्त


अभी सायंकाल मुहूर्त में भी भक्त गणेश जी का विसर्जन कर सकते है। सायंकाल मुहूर्त 6.21 से रात 10.46 बजे तक रहेगा। रात्रि मुहूर्त 1.43 से 3.12 तक रहेगा। उषाकाल मुहूर्त 4.40 से सुबह 6.08 बजे तक रहेगा। बता दें कि रविवार की सुबह 5.59 बजे से चतुर्थी तिथि प्रारंभ हुई है जो सोमवार सुबह 5.28 तक जारी रहेगी।


ऐसे करें गणपति विसर्जन


गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करने से पूर्व उसका विधि विधान से पूजन करें। इसके बाद मोदक और फलों का भोग लगाएं। गणपति की आरती करें और उनसे विदा लेने की प्रार्थना करें। इसके बाद एक लकड़ी के पटरे पर लाल वस्त्र बिछाकर उसपर गंगाजल छिड़कें। इसपर फल, फूल, मोदक आदि रखें। 


इसके अलावा चावल, गेहूं, पंचमेवा की पोटली बनाकर उसमें कुछ सिक्के डालें। इस पोटली को गणेश जी के पास रखें। इसके बाद गणेश जी की मूर्ति को विसर्जन के लिए लेकर जाएं। विसर्जन करने से पूर्व एक बार उनकी पुन: आरती उतारते हुए अगले वर्ष जल्दी आने की कामना करें और उन्हें विसर्जित कर दें।


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