पार्टी पर मजबूत पकड़ के साथ केजरीवाल तीसरी बार बने “आप” के राष्ट्रीय संयोजक

पार्टी पर मजबूत पकड़ के साथ केजरीवाल तीसरी बार बने “आप” के राष्ट्रीय संयोजक

नई दिल्ली| पार्टी की स्थापना के बाद से अब तक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर नियुक्त होते रहे है। वहीं रविवार को पार्टी ने सर्वसम्मति से उन्हें तीसरी बार इस पद की जिम्मेदारी दी गई है।


इस घटनाक्रम से वाकिफ पार्टी के सूत्रों ने मीडिया को बताया कि रविवार को हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान केजरीवाल को सर्वसम्मति से आप का राष्ट्रीय संयोजक चुना गया है।


पार्टी सूत्रों ने बताया कि आप नेता पंकज गुप्ता को पार्टी का सचिव चुना गया है जबकि दिल्ली से पार्टी के राज्यसभा सदस्य नारायण दास गुप्ता को कोषाध्यक्ष चुना गया है।


इससे पहले शनिवार को पार्टी ने अपनी 10वीं राष्ट्रीय परिषद की बैठक की थी, जिसमें 34 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्यों के नामों को मंजूरी दी गई थी।


केजरीवाल और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और दिल्ली विधानसभा की उपाध्यक्ष राखी बिरलान के अलावा, गुजरात, पंजाब और गोवा सहित चुनावी राज्यों के कई नेताओं को आप की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह मिली है।


आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों में कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन, गोपाल राय और इमरान हुसैन, आतिशी, दुर्गेश पाठक, राघव चड्ढा, एनडी गुप्ता, दिलीप पांडे, संजय सिंह, प्रीति शर्मा मेनन, पंकज गुप्ता, राजेंद्र पाल गौतम, दिनेश मोहनिया, गुलाब सिंह, कैप्टन शालिनी सिंह, आदिल खान, बलजिंदर कौर, अमन अरोड़ा, हरपाल चीमा, सरवजीत कौर मनुके, डॉ अल्ताफ अहमद, महेश बाल्मीकि, नीलम यादव, वेन्जी वेगास, ईशुदान गढ़वी, गोपाल इटालिया, भगवंत मान, पृथ्वी रेड्डी, सुशील गुप्ता, कर्नल अजय कोठियाल और राहुल म्हाम्ब्रे शामिल हैं।


पार्टी पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, उत्तर प्रदेश और गुजरात पर ध्यान केंद्रित करके देश के अन्य हिस्सों में अपने पदचिह्न का विस्तार करना चाहती है।


केजरीवाल ने शनिवार को राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, "पार्टी में पद के लिए कभी लालची मत बनो, लालच से कुछ हासिल नहीं होगा।"


उन्होंने कहा, "इस पार्टी में, आपको केवल तभी शांति से रहना चाहिए जब आप अपने काम से संतुष्ट हों, इसलिए नहीं कि आप किसी मुकाम पर पहुंच गए हैं। आपका काम इस तरह का होना चाहिए कि पद आपके पास आ जाए और आपको पद के पास न जाना पड़े। यदि आप हमारे पास आते हैं और कहते हैं कि आप एक पद या टिकट चाहते हैं, तो इसका मतलब है कि आप जो चाहते हैं उसके लायक नहीं हैं।"

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