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कौन सा अविष्कार हार्ट अटैक और मौत के खतरे को रोकेगा ?

कौन सा अविष्कार हार्ट अटैक और मौत के खतरे को रोकेगा ?

नई दिल्ली | हाल ही के दिनों में कुछ फिल्म कलाकारों एवं अन्य बड़ी हस्तियों अचानक मृत्यु की खबरें सामने आई थीं। स्वस्थ और कम उम्र होने के बावजूद यह मौतें हार्ट अटैक से हुईं। विशेषज्ञों का कहना है इसका एक बड़ा कारण अति व्यायाम है। आईआईटी के स्कॉलर्स ने एक ऐसा आविष्कार किया है जो अधिक एक्सरसाइज के कारण होने वाले हार्ट अटैक के खतरे के प्रति सजग करेगा। 


दरअसल तेजी से भागती आज की इस दुनिया में नियमित व्यायाम करना स्वस्थ रहने के तरीकों में से एक है, लेकिन कम ही लोग अपनी व्यायाम क्षमता को जानते हैं। इस वजह से वह अक्सर अति-व्यायाम कर लेते हैं, जो कभी कभी जानलेवा साबित होता है । 


आईआईटी गांधी नगर के शोधकतार्ओं ने अति-व्यायाम के जोखिम को रोकने के लिए कार्डियक-सेंसिटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-सक्षम वर्चुअल रियलिटी-आधारित ट्रेडमिल व्यायाम प्लेटफॉर्म का आविष्कार किया है।


इस इनोवेशन से हृदय की सहनशक्ति, गति संतुलन और चलने के पैटर्न में सुधार हो सकता है, जिससे अति-व्यायाम के जोखिम को रोका जा सकता है। साथ ही यह इनोवेशन एक अनुकूली, प्रगतिशील और इमर्सिव व्यायाम अनुभव प्रदान करता है। यह जिम और ट्रेडमिल उपयोगकतार्ओं के साथ-साथ ऐसे रोगियों के लिए बहुत उपयोगी है जिन्हें चलने में समस्या है। 


आईआईटी गांधीनगर के अनुसंधान दल ने इस आविष्कार के लिए एक भारतीय पेटेंट भी दायर किया है।


कभी-कभी स्वस्थ जिम उपयोगकतार्ओं और चाल विकार वाले व्यक्तियों (जो चलने के दौरान अतिरिक्त ऊर्जा व्यय से पीड़ित होते हैं) में कार्डियक ओवरलोड से घातक दुर्घटनाओं का कारण भी हो सकती हैं। व्यक्ति की व्यायाम क्षमता की वैविद्यपूर्ण प्रकृति को देखते हुए, व्यक्तिगत व्यायाम तीव्रता दो बातें सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है 1) पर्याप्त व्यायाम परिणाम और (2) किसी भी घातक दुर्घटना की संभावनाओं को कम करना। 


आम तौर पर, व्यायाम के स्तर के बारे में निर्णय प्रशिक्षकों या चिकित्सकों द्वारा लिए जाते हैं जो किसी व्यक्ति की हृदय और शारीरिक क्षमताओं की बारीकी से निगरानी करते हैं और व्यायाम प्रोटोकॉल को नियंत्रित करते हैं। हालांकि, इस तरह के चाल अभ्यास सत्रों के दौरान निरंतर निगरानी और प्रशिक्षक या चिकित्सक की उपस्थिति सीमित स्वास्थ्य संसाधनों के साथ एक चुनौती बन सकती है। 


इस बहु-आयामी और अक्सर उपेक्षित स्वास्थ्य चिंता को दूर करने के लिए, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर उत्तमा लाहिरी के नेतृत्व में शोधकतार्ओं की एक टीमने एक वर्चुअल रियलिटी -आधारित ट्रेडमिल व्यायाम प्लेटफॉर्म ह्यपीट्रेड एक्स का आविष्कार किया है। यह व्यक्तिगत, अनुकूली और प्रगतिशील ट्रेडमिल व्यायाम प्रदान करता है। यह उपयोगकर्ता को न तो कम चुनौती देता है जिससे व्यायाम के परिणाम सीमित हो जाए और न ही क्षमता से अधिक चुनौती देता है जो अनुचित तनाव या नुकसान का कारण बने। 


यह आविष्कार आईआईटी गांधी नगर के पूर्व पीएचडी छात्र डॉ धवल सोलंकी के पीएचडी शोध का हिस्सा था, जिसमे उनके साथ आईआईटी के डिजाइन एंड इनोवेशन सेंटर के सहायक टीचिंग प्रोफेसर मानसी कनेतकर, औद्योगिक डिजाइनर श्री नीरवकुमार पटेल, और जूनियर रिसर्च फेलो श्री आनंद चौहान भी जुड़े थे।


अब सवाल है कि ये आविष्कार कैसे काम करता है और इसके क्या लाभ हैं? 


दरअसल, 'पीट्रेड एक्स' में वर्चुअल रियलिटी-आधारित इमर्सिव टास्क मॉड्यूल ट्रेडमिल-आधारित व्यायामों के साथ एकीकृत हैं, जो वास्तविक समय में व्यक्ति के कार्डियक लोड की निगरानी में और उपयोगकर्ता को कोई अनुचित तनाव या नुकसान पहुंचाए बिना कार्डियक सहनशक्ति में सुधार के लिए व्यायाम पैरामीटर सेट मदद में करता हैं। 


यह एक फिजियोलॉजी-सेंसिटिव सिस्टम के रूप में काम करता है जिसका कामकाज या व्यवहार उपयोगकर्ता के शारीरिक मापदंडों और आराम के स्तर पर निर्भर करता है। संपूर्ण प्रणाली उपयोगकर्ता के शारीरिक व्यवहार को महसूस करती है और उपयोगकर्ता द्वारा किए जाने वाले व्यायाम के चुनौती स्तर को स्वायत्तता से तय करती है। चुनौती का स्तर विभिन्न रूपों का हो सकता है, जैसे ट्रेडमिल की गति में बदलाव, ऊंचाई आदि।


इस प्रणाली का वर्चुअल रियलिटी-आधारित कार्य मॉड्यूल विभिन्न आभासी ²श्यों और वातावरणों को पेश करता है। यह एक मानव अवतार को उसके पथ पर प्रदर्शित करता है जिसके चलने या दौड़ने की गति उपयोगकर्ता के ट्रेडमिल पर दौड़ने की गति के बराबर होती है। यह ट्रेडमिल पर उपयोगकर्ता के प्रदर्शन के आधार पर ऑडियो-विजुअल फीडबैक के साथ साथ ट्रेडमिल की गति, ऊर्जा खपत, धड़कन की गति आदि जैसी अन्य जानकारी भी दिखाता है। 


आविष्कृत तकनीक के सफल परीक्षणों से पता चला है कि ट्रेडमिल व्यायाम की वास्तविक समय पर, व्यक्तिगत और प्रगतिशील चाल की निगरानी तथा मात्रा के ठहराव के परिणामस्वरूप पीट्रेडएक्स प्लेटफॉर्म का उपयोग करके व्यायाम करने वाले व्यक्तियों के हृदय की सहनशक्ति, चाल क्षमता, चलने की गति और गतिशील संतुलन में सुधार हुआ है। यह प्लेटफॉर्म व्यक्ति को उसके शरीर की सीमा के अनुसार एक मध्यम व्यायाम प्रणाली का पालन करने में मदद करता है जिससे अधिक व्यायाम के कारण चोटों या मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है।


इस इनोवेशन की उपयोगिता के बारे में बात करते हुए, प्रोफेसर उत्तमा लाहिरी, ने कहा, 'पीट्रेडएक्स स्वास्थ्य के प्रति जागरूक जिम जाने वाले या ट्रेडमिल उपयोगकतार्ओं और चाल विकार वाले व्यक्तियों के लिए भी बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। हमारा लक्ष्य स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और व्यायाम के प्रति उत्साही लोगों के साथ-साथ चाल में विकार वाले रोगियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। '


अनुसंधान दल ने इस नवाचार और इसकी पद्धति के लिए एक भारतीय पेटेंट भी दाखिल किया है। इसके अलावा, इस शोध आविष्कार के परिणाम दो अंतरराष्ट्रीय सहकर्मी-समीक्षित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।