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राष्ट्रपति ने 8 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में निदेशकों की नियुक्ति को मंजूरी दे

राष्ट्रपति ने 8 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में निदेशकों की नियुक्ति को मंजूरी दे

शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को घोषणाकर बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आठ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में निदेशकों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। जुलाई में कार्यभार संभालने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा अनुमोदित उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्तियों का ये पहला बड़ा सेट है।

नए निदेशकों की नियुक्ति किये जाने संस्थानों में आईआईटी में पलक्कड़, तिरुपति, धारवाड़, भिलाई, गांधीनगर, भुवनेश्वर, गोवा और जम्मू के प्रौद्योगिकी संस्थान शामिल हैं। नई नियुक्त पाने वालों में आईआईटी में सेवारत निदेशक या प्रोफेसर हैं। उदाहरण के लिए प्रोफेसर ए शेषाद्री शेखर जो वर्तमान में IIT मद्रास में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े हैं, IIT पलक्कड़ के नए निदेशक होंगे।

IIT तिरुपति का नेतृत्व प्रोफेसर के एन सत्यनारायण करेंगे जो वर्तमान में IIT तिरुपति के निदेशक हैं। आईआईटी खड़गपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर वेंकप्पय्या आर देसाई आईआईटी धारवाड़ के प्रमुख होंगे।

IIT भिलाई के वर्तमान निदेशक प्रोफेसर रजत मूना, IIT गांधीनगर के अगले प्रमुख होंगे। IIT गांधीनगर के पूर्व निदेशक को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया है।

IIT भिलाई का नेतृत्व स्कूल ऑफ मैटेरियल साइंस एंड टेक्नोलॉजी, IIT (BHU) के प्रोफेसर राजीव प्रकाश करेंगे। IIT मद्रास के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो श्रीपद कर्मलकर IIT भुवनेश्वर का नेतृत्व करेंगे।

IIT धारवाड़ के निदेशक डॉ. पासुमार्थी सेशु, आईआईटी गोवा के प्रमुख होंगे, जबकि आईआईटी जम्मू के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर मनोज सिंह गौड़ अब संस्थान के पूर्णकालिक निदेशक होंगे।

इनमे से बहुत से संस्थान वर्षों से बिना किसी निदेशक के हैं इसका अर्थ यह लगाया जा रहा है की सरकार सामान्य प्रक्रिया के विपरीत  जाकर इन नियुक्तियों को एक साथ  अधिसूचित करेगी। संयोग से पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जुलाई 2021 में 12 विश्वविद्यालयों के कुलपति नियुक्त किए थे।

तमिलनाडु के आधिकारिक दौरे पर आए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को IIT मद्रास में एक कार्यक्रम में कहा कि IIT केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं हैं, वे वैज्ञानिक सोच और मानवता के भविष्य को आकार देने वाले मंदिर हैं। हमारे समाज को आईआईटी से काफी उम्मीदें हैं। हमारे आईआईटीयन को विकास और विकास का पथ प्रदर्शक बनना होगा।