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सोने की शाल किसकी

सोने की शाल किसकी

सोने की शाल किसकी-मेधज न्यूज़

बहुत समय पहले की बात है परम ज्ञानी विद्वान भगवान में बहुत ज्यादा आस्था रखने वाले तेजस्वी साधु जी का लम्बी बीमारी के चलते देहांत हो गया, उधर एक नशेबाज शराबी का रोड एक्सीडेंट में स्वर्गवास हो गया। अब साधु महाराज जी स्वर्ग के द्धार पर अंदर जाने के लिए बहुत देर से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। तभी साधु ने देखा, उसके आगे एक काला चश्मा, जींस, लेदर जैकेट पहन कर एक जाटव खडा था। तभी धर्मराज अंदर से आये।
धर्मराज ने जाटव से पूछा - कौन हो तुम ?
जाटव- मैं उत्तर प्रदेश की रोडवेज का ड्राइवर हूँ।
धम॔राज - ये लो सोने की शाल और अंदर जाकर गोल्डन रूम ले लो !
साधु महाराज जी मन ही मन बहुत खुश हो रहे थे की जब इसको सोने की शाल मिल गई
तब तो मुझे कोई अच्छा उपहार ही  मिलेगा
तभी धम॔राज ने साधु से पूछा -अब तुम बताओ कौन हो तुम ?
साधु- मैं साधु हूँ, और 40 सालो से लोगों को भगवान के बारे में बताया करता था !
धम॔राज साधु से - ये लो सूती वस्त्र और अंदर जा कर छप्पर में अपना स्थान ग्रहण करो।
साधु - भगवान, ये गलत है ये तेज गति से गाड़ी चलाने वाले को सोने की शाल और जिसने पूरा जीवन भगवान का ज्ञान दिया आप उसे सूती वस्त्र दे रहे है ?
धम॔राज - परिणाम मेरे बच्चे परिणाम..जब तुम ज्ञान देते थे उस वक्त सभी भक्त सोते रहते थे।
लेकिन जब यह जाटव बस को तेज गति से चलाता था तब सब लोग सच्चे मन से भगवान को याद करते थे।

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