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सप्त ऋषि और उनकी विशेषताएं..

सप्त ऋषि और उनकी विशेषताएं..

राजा दशरथ के कुलगुरू और चारों पुत्र राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न के गुरु..!गुरु वशिष्ठ के कहने पर ही दशरथ ने अपने चारों पुत्रों को गुरु विश्वामित्र के साथ आश्रम में राक्षसों का वध करने के लिए भेज दिया था..!!

कामधेनु गाय के लिए वशिष्ठ और विश्वामित्र में युद्ध भी हुआ था.

दूसरें ऋषि विश्वामित्र..

ऋषि बनने से पहले विश्वामित्र एक राजा थे और वे ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय हड़पना चाहते थे इसके लिए उन्होंने युद्ध भी किया था लेकिन ऋषि वशिष्ठ से हार गए थे इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया..!

इनकी तपस्या अप्सरा मेनका ने भंग की थी इन्होंने एक स्वर्ग की रचना भी कर दी थी..!!

इन्होंने गायत्री मंत्र की रचना की थी जो आज भी बहुत चमत्कारी है.

३) तीसरे ऋषि है कण्व.-

ये वैदिक काल के ऋषि है इन्होंने अपने आश्रम में हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला और उनके पुत्र भरत का पालन पोषण किया था..!

भरत के नाम पर ही इस देश का नाम भारत हुआ है..!!
ऋषि कण्व ने लौकिक ज्ञान विज्ञान और अनिष्ट निवारण संबंधित अनेक मंत्र रचे हैं.

४) चौथे ऋषि है भारद्वाज.-

वैदिक ऋषियों में इनका स्थान भी काफी ऊंचा है इनके पिता ब्रहस्पति देव और मां ममता थी..!भारद्वाज ऋषि श्री राम के जन्म से पहले अवतरित हुए थे इनकी लंबी आयु का पता इस बात से चलता है कि वनवास के समय श्री राम इनके आश्रम में गए थे..
इन्होंने वेदों में कई मंत्र रचे हैं इन्होंने भारद्वाज स्मृति और भारद्वाज संहिता की भी रचना की है.

५)पांचवें ऋषि है अत्रि..-महर्षि अत्रि ब्रह्मा के पुत्र सोम के पिता और कर्दम प्रजापति व देवहूति की पुत्री अनुसूया के पति बताएं गये है..!
एक कथा के अनुसार अत्रि जब अपने आश्रम से बाहर गए थे तब त्रिदेव अनुसूया के घर भिक्षा लेने पहुंचे थे मां अनुसूया ने मां सीता को पतिव्रत धर्म का उपदेश दिया था..!!
भगवान दत्तात्रेय, चंद्रमा और दुर्वासा के माता-पिता है.

६) छठे ऋषि है वामदेव.-

इन्होंने सामगान यानि संगीत की रचना की है..!

ये गौतम ऋषि के पुत्र थे भरत मुनि द्वारा रचित भरत नाट्य शास्त्र सामवेद से ही प्रेरित है..!!हजारों वर्ष पहले रचे गए सामवेद में संगीत और वाद्ययंत्रों की संपूर्ण जानकारी मिलती है.

७) सातवे ऋषि है शौनक -

प्राचीन समय में शौनक ऋषि ने दस हजार विद्यार्थियों का गुरूकुल स्थापित किया था और कुलपति बनने का सम्मान हासिल किया..!किसी भी ऋषि ने ऐसा सम्मान पहली बार हासिल किया था..!!

इन्होंने भी कई मंत्र रचे हैं.

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम,  राम राम हरे हरे ||