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आज का जीवन मंत्र

आज का जीवन मंत्र

हमे जीवन  में आसुरी वृत्तियों को नहीं देव वृत्तियों को अपनाना चाहिए !
सार = हमारे जीवन में मानव-जीवन में  दैवी और आसुरी प्रवृत्तियों का एक मिला-जुला रूप है । जीवन में दोनों वृत्तियाँ सक्रिय रहने का प्रयत्न करती रहती है । मुक्ति के आकांक्षी व्यक्ति को चाहिए कि वह अपना सारा सहयोग "दैवी" प्रवृत्तियों को बढ़ाने, प्रोत्साहित करने तथा पालने में लगाए ।

दैवी वृत्ति के लक्षण हैं:-
"परिश्रम,पुरुषार्थ, त्याग,प्रसन्नता,उदारता,उत्साह,आशा तथा मर्यादा आदि, जिनको ग्रहण करने से मनुष्य की आत्मा में हर्ष तथा आनंद का प्रकाश आता है और संसार-समर में एक साहसी योद्धा की तरह अविरल संघर्ष करते रहने का बल प्राप्त होता है ।

आसुरी प्रवृत्तियों के लक्षण हैं:- 
आलस्य,प्रमाद,स्वार्थ-लिप्सा,आवेश,उत्तेजना अथवा पतन की ओर अग्रसर होना । 
मनुष्य दैवी तथा आसुरी वृत्तियों का एक समन्वित रूप है, जिसकी बंधन अथवा मुक्ति दो ही गतियाँ हो सकती हैं । यद्यपि वह "शुद्ध-बुद्ध" और "स्वभावतः मुक्त परमात्मा का अंश है, 

तथापि उसे मुक्ति के साथ बंधन की संभावनाएँ देकर संसार में इसलिए भेजा गया है कि वह अपने गुणों तथा "देवत्व" को विकसित करने के लिए प्रतिकूलताओं से संघर्ष करता हुआ पुरुषार्थ का परिचय दे! और इस प्रकार इस संसार-लीला को रोचक और सक्रिय बनाता हुआ अपने उस परमपिता परमात्मा का मनोरंजन करे, जिसने एकाकीपन बदलने के लिए इस विचित्र संसार-नाटक की रचना की है !इसलिए अपने जीवन में सुधार लेन का प्रयत्न करे !!
!!राधे राधे !!