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गंगा नदी के तट पर बना पक्का घाट -मिर्जापुर

गंगा नदी के तट पर बना पक्का घाट -मिर्जापुर

मिर्जापुर जिले के मध्य में स्थित पक्का घाट शहर का सबसे प्रसिद्ध घाट है। गंगा नदी के तट पर 200 वर्ष पहले प्रसिद्ध व्यापारी नबालक साव ने इस पक्के घाट का निर्माण कराया था। बालक साव ने उस समय इस घाट को 1लाख 82 हजार की लागत से बनवाया था। 

ये पक्का घाट बहुत सुंदर बना हैं। पक्का घाट का निर्माण बलुआ पत्थर पर सुंदर नक्काशी के साथ अद्भुत संरचना है। पक्का घाट के निर्माण में मिर्जापुर जनपद के ही पत्थरों का प्रयोग किया गया है। इस जगह पर खड़े होने पर ठंडी हवा का भरपूर आनन्द लिया जा सकता है। घाट के किनारे एक काफी बड़ा हिस्सा में बरामदा बना है जो खम्भों की सहायता से ढका हुआ है जिसके कारण ऊपर बड़ी छत है जहाँ से गंगा दर्शन एवं ठंडी हवा का अपूर्व सुख प्राप्त होता है। 

बारहदरी की छत पर चारों तरफ की रैलिंग के रुप में पत्थर की कठिनसाध्य एवं दुर्लभ जालियों में अलग अलग डिजाइन बनाई गई है। जितने प्रकार की जाली है उतनी ही डिजाइन।है। घाटों को विद्युत झालरों और और रगीन रोशनी से सजाया गया है।

पक्का घाट पर शाम की आरती भव्य मानी जाती है। मां गंगा की विशेष पूजन करके पांच अर्चकों के साथ आरती की जाती है। शाम की आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।  

यह घाट का किनारा आज भी यहां पर आने वालों को सुकून प्रदान करता है। यह पक्का घाट 200 साल बाद भी ज्यों का बना हुआ है। हालांकि रख-रखाव के अभाव में कुछ जीर्णशीर्ण होने लगा है। पक्का घाट में आज भी महिलाओं के लिए पसंदीदा बाजार है, यहाँ महिलाएं वस्त्र, आभूषण आदि खरीदती हैं।