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कानपुर संग्रहालय के मुख्य आकर्षण का केंद्र क्या है जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहाँ आते

कानपुर संग्रहालय के मुख्य आकर्षण का केंद्र क्या है जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहाँ आते

कानपुर संग्रहालय शहर का आधिकारिक संग्रहालय है। नाना राव पेशवा स्मारक पार्क फूल बाग के काफी करीब स्थित है। नानाराव पेशवा स्मारक पार्क में स्थापित संग्रहालय अखंड भारत के गौरवशाली इतिहास को जन-जन से परिचित करा रहा है। बिठूर के नानाराव पेशवा स्मारक में कानपुर संग्रहालय की स्थापना सन 2005 में  हुई थी । पार्क में एक विशाल बरगद का पेड़ भी है जिसके बारे में कहा जाता है कि इसकी उम्र का पता नहीं है यह लंबे समय से यहाँ पर है। 

1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम से कानपुर शहर का गहरा नाता रहा है। इसके प्रमाण आज भी बिठूर के संग्रहालय में मौजूद हैं, जो क्रांतिकारियों के संघर्ष की गौरवगाथा व आजादी का बखान करते हैं। यहां पर तात्या टोपे की परिवार की रिहाई का वह शाही परवाना भी रखा हुआ है जिसे 28 फरवरी 1858 में लिखा गया था। अजीमुल्लाह खां की शौर्य गाथा के समय के अस्त्र-शस्त्र भी रखे हुए हैं। भारत पाकिस्तान बंटवारे के दुर्लभ तस्वीर का सँग्रह मौजूद हैं।

कानपुर संग्रहालय में चौथी से 19वीं सदी के सोने, चांदी व पत्थर के प्राचीन सिक्के का संग्रह आज भी मौजूद हैं। मोहनजोदड़ो की अनुकृति, कुषाण वंश, मौर्या वंश, गुप्त वंश और मुगल काल  के प्राचीन सिक्के, कुषाण काल के उमा महेश्वर, लोकेश्वर, गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित है। 1696 में बना जैनियों का भक्तांबर शास्त्र व ओरछा राज घराना का अस्त्र,  प्राचीन ऐतिहासिक शिल्प लेख, अलंकृत शिलाखंड, अभिलिखित ईटें, संग्रहालय में 1914 प्रथम विश्व युद्ध के पदक का संग्रह है। इतिहास की कहानियां व फोटो संग्रहालय में आज भी मौजूद हैं। 

कानपुर संग्रहालय में  एक पुरानी तोपखाने की तोप शामिल हैं। यहाँ पर सोने, चांदी व पत्थर के प्राचीन सिक्के का संग्रह आज भी मौजूद हैं। अंग्रेजों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संघर्ष की गाथा सुनाने वाला इस संग्रहालय को लगातार विकसित किया जा रहा है। जो इस संग्राहलय के मुख्य आकर्षण का केंद्र है, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहाँ आते हैं।