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भगवान विष्णु जी सर्वप्रथम काशी में यहाँ पर आये थे।

भगवान विष्णु जी सर्वप्रथम काशी में यहाँ पर आये थे।

वाराणसी में गंगा तट पर अनेक सुंदर घाट बने हैं। आदिकेशव घाट वरुणा व गंगा के संगम पर स्थित है। ये सभी घाट किसी न किसी पौराणिक या धार्मिक कथा से संबंधित हैं।

मान्यता है काशी खंड के तीसरे भाग में वर्णन है की, जब भगवान शिव की आज्ञा से भगवान विष्णु जी सर्वप्रथम काशी में आये थे। तो वह इसी वरुणा व गंगा के संगम तट पर पधारे थे। काशी में वरुणा व गंगा के संगम तट पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी जी के पैर पड़ने से इस जगह को विष्णु पादोदक के नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु जी स्नान करने के पश्चात अपने तैलेक्य व्यापनी आकृति की मूर्ति की स्थापना की थी। उसका नाम आदि केशव रखा था।

सर्वप्रथम ग्यारहवीं सदी में गढ़वाल वंश के राजाओं ने आदिकेशव मंदिर व घाट का निर्माण कराया था। कुछ वर्षो के पश्चात यह घाट क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसका पुन: निर्माण ग्वालियर के राजा दीवान नरसिंह राव ने सन् 1906 में कराया।

आदिकेशव घाट पर हिन्दू धरम के लोगो का मुण्डन संस्कार, नामकरण, उपनयन एवं अन्य संस्कार सम्पन्न होते है। घाट पर भाद्र माह के शुक्ल द्वादशी को वारूणी पर्व का मेला आयोजित होता है। जिसमें सास्कृतिक कार्यक्रमों  का आयोजन किया जाता है।

वर्तमान में सरकार ने मुख्य घाट का निर्माण करा कर पक्का बना दिया है। धार्मिक महात्म्य होने के कारण पर्व विशेष पर स्थानीय एवं दूर-दूर से श्रद्धालु यह पर स्नान करने आते है। बनारस शहर के बाहर स्थित होने के कारण यहाँ पर श्रद्धालु की संख्या कम होती है।