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बेगुर में 10वी शताब्दी के पूर्व में संगठित मानव सभ्यता का विकास हुआ था।

बेगुर में 10वी शताब्दी के पूर्व में संगठित मानव सभ्यता का विकास हुआ था।

बेगुर वन्यजीव अभयारण्य वायनाड जिले में केरल के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यह केरल के उत्तर में वायनाड ज़िले के मानंतवाडी से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अपने ख़ूबसूरत वातावरण और सुन्दर प्राकृतिक दृश्यों के लिए मशहूर है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान उपुक्त है। आपको पहाड़, झरने, हरियाली, वादियां, नदियां और चट्टानें देखनी हों एवं पक्षियों का कलरव सुनना हो तो, यहाँ से अच्छी जगहे प्रकति में कही और मिलना नामुमकिन सा हैं, यहाँ  प्रकृति और हरियाली की खूबसूरती बड़ी ही मनमोहक है। 


यहाँ की हरी-भरी पहाड़ियाँ वनों की हरियाली और दुर्लभ जीव-जंतुओं की प्रजातियां इसे देखने लायक जगह बनाती हैं। यहाँ की घाटियों में आप को अनेक  प्रकार की प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों व जंगली जानवर राष्ट्रीय उद्यान में स्तनधारी प्रजातियाँ बड़ी संख्या में हाथी, जंगली भैंसा, हिमालयीन भालू, तकिन, जंगली बकरी, कस्तूरी मृग, जंगली सूअर बकरी मृग, बिन्टूरांग, गिलहरी, लाल पांडा, थोड़ी सी ऊंचाई पर  बाघ, चीता, हिम तेंदुआ भालू और क्लाऊडेड लेपर्ड ,बिल्ली की प्रजातियाँ इस क्षेत्र में पाए जाने वाले कुछ जानवर हैं। 


यहाँ आपको जंगली कुत्तों के झुंड भी देखने को मिल सकते हैं। हिमालय में संपूर्ण जैव विविधता का बड़ा संरक्षित क्षेत्र है। यहां प्रति वर्ष देश और विदेश से बड़ी तादाद में टूरिस्ट घूमने के लिए आते हैं। यहाँ की पहाड़ियों में चाय तथा फलो के बड़े बड़े बगीचे देखने को मिलजाते है।


यह स्थान ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक दृष्टि से काफ़ी महत्त्वपूर्ण है। इतिहासकारों का मानना है, पर्वतीय पठारों की सुरम्य ऊंचाइयों पर बसा यह स्थान पर ही संगठित मानव सभ्यता का विकास ईसा से 10 शताब्दी के पूर्व से था।