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जंगल के अंदर रस्सी से बने पुलों या बोर्डवॉक के सहारे जाना पड़ता है

जंगल के अंदर रस्सी से बने पुलों या बोर्डवॉक के सहारे जाना पड़ता है

तमन नेगारा राष्ट्रीय उद्यान मलेशिया प्रायद्वीपीय देश का राजपत्रित पहला और सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 1984 में विरासत पार्क घोषित किया गया था। राष्ट्रीय उद्यान का कुल क्षेत्रफल 4,343 वर्ग किलोमीटर फैला हुआ है।

वर्षावन क्षेत्र में ज्यादातर तलछटी चट्टानें हैं, जिनमें पूर्वी भाग में छोटी ग्रेनाइट चट्टानें पायी जाती हैं। तलछटी चट्टानों में बलुआ पत्थर, शेल और चूना पत्थर होते हैं। यह वर्षावन के शानदार दृश्य प्रदान करता है। जंगल के अंदर जाने की लिए इसमें रस्सी के बने पुलों या बोर्डवॉक सर्किट से होकर जाना पड़ता है। अद्भुत पहाड़ों, हरेभरे घाटियों, इठलाते झरनों, घने जंगलों और समृद्ध वन्य जीवन से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। 

उद्यान दुर्लभ किस्म के वनस्पतियों और जीवों की कई प्रजातियों को संरक्षित करता है, पार्क भी वनस्पतियों से भरा हुआ है और कुछ लोकप्रिय किस्में महोगनी, बांस, रतन, ताड़ आदि के वन पाये जाते हैं। यहां पौधों और जानवरों की कई दुर्लभ प्रजातियां भी हैं। और उनमें से कई मलेशिया में स्थानिक, दुर्लभ, कमजोर या अन्यथा खतरे में पड़े जीव हैं। मलेशिया में सबसे अधिक जहरीले किंग कोबरा पाये जाते हैं। ये दुनिया के सबसे लंबे विषैले सांप हैं जिनकी लंबाई 5.7 मीटर तक है। राष्ट्रीय उद्यान मलय बाघ, केकड़ा खाने वाले लंगूर, मलय गौड़ और दुर्लभ मलय मोर, तीतर जैसे पक्षियों का घर है। वर्षावनों से भरपूर, यह पक्षियों, स्तनधारियों, सरीसृपों और कीड़ों की कई प्रजातियों को आश्रय देता है।

कुआलालंपुर हवाई मार्ग द्वारा दुनिया के बाकी हिस्सों से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। भारत से कुआलालंपुर के लिए लगातार उड़ानें हैं। कुआलालंपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा मलेशिया का मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। दक्षिण पूर्व एशिया में प्रमुख हवाई अड्डों में से एक है।