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अनगिनत हैं...

अनगिनत हैं...

यादों के नाम पर, 
एहसास अनगिनत हैं,
दूरियों के बाद भी, 
जज़्बात अनगिनत हैं,
मिलना-बिछड़ना तो, 
खेल है किस्मतों का ,
पर याद रखने वाली, 
मुलाकात अनगिनत हैं;

ख्वाब सरीखी दुनिया, 
जो जी मैंने, तेरे साथ थी,
रंगीन खतों के रूप में, 
वो काग़जात अनगिनत हैं,
हमारे मिलन की परवाह, 
कभी थी ही नहीं किसी को,
पर विरह करने को उठे, 
प्रतिवाद अनगिनत हैं,

तुझसे जुड़ी हर बात, 
हर लम्हा मुझे प्यारा है,
नहीं चाहिए कोई मुझे,
सौगात अनगिनत है,
उन मौकों की नज़ाकत पर,
खामोशियाँ ही सूत्रधार थी, 
अनकही जो रह गयीं,
वो बात अनगिनत हैं,

जाने कितने दिन मैंने, 
युहीं तन्हा ही गुजारे हैं,
मुझे दर्द में लपेटे हुए,
कई रात अनगिनत हैं,
तेरे अक्स से अक्सर ,
अब मेरी मुलाकात होती है,
जिसमें हमारे दरम्यां होते
कई संवाद अनगिनत हैं।
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---(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")---

नोट: मेरी पिछली रचना आप इस लिंक के माध्यम से पढ़ सकते हैं- 
ज़िन्दगी एक रास्ता है: https://medhajnews.in/news/entertainment/poem-and-stories/life-is-a-journey