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कहानी- क्योंकि तुम एक भारतीय हो (भाग-4)

कहानी- क्योंकि तुम एक भारतीय हो (भाग-4)

नोट:- इस कहानी के पहले से प्रकाशित भागों को आप निचे लिखे लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं:

अब आगे की कहानी..........

कुछ ही सेकण्ड्स में सुकन्या माँ का खिलखिलाता हुआ चेहरा उनके सामने था किसी फोटो में वो मंदिर में खड़ी थीं, किसी में गंगा के घाटों पर, किसी में पानी-पूरी खाते हुए, किसी में डैड के साथ में लम्बा सिंदूर लगाए हुए, कहीं लहलहाते खेतों के बीच में....ऐसी ही बहुत सी यादें तस्वीरों और वीडियोस के रूप में उस कैमरे में कैद मिली और डैड को बेचैन कर गयीं।
पर फिर उनके दिल में एक कसक सी उठी कि जब मॉम ने उनसे पहले ही कह दिया था कि जरुरी नहीं कि ये रिश्ता जीवन भर चले तब तो मॉम के जाने पर उन्हें इतनी तकलीफ हो रही है तो फिर सुकन्या माँ जिनसे उन्होंने जीवन भर साथ निभाने का वादा करके विवाह किया था उन्हें कैसा लगा होगा उनके वापस न जाने पर या उस धोखे से जो उन्होंने सुकन्या माँ को दिया। जाने क्यों उन्हें एकाएक ये ख्याल उभर आया मन में कि 'क्या सुकन्या माँ ने दूसरी शादी कर ली होगी या आज भी उनका इंतज़ार कर रही होगी?' फिर उन्होंने खुद ही झिड़क दिया इस ख्याल को कि इतना टाइम बीत गया है वो तो उनका चेहरा भी भूल गयी होंगी इंतज़ार तो बहुत दूर की बात है। पर अब कहीं न कहीं सुकन्या माँ को देखने कि उनकी तीव्र इच्छा बढ़ती जा रही थी। फिर बिना किसी उम्मीद के उन्होंने, बस उन्हें देखने के लिए इण्डिया जाने का निश्चय किया।
मेरी देखभाल के लिए नैनी थी घर पर, पर जाने क्यों उन्होंने मुझे भी साथ इंडिया ले जाने का सोचा। बस फिर क्या था कुछ ही दिनों बाद हम दोनों बनारस के एयरपोर्ट पर खड़े थे। चूँकि माँ की वर्तमान स्थिति के बारे में कुछ पता नहीं था तो डैड मुझे लेकर पहले एक होटल गए फिर कुछ टाइम रेस्ट करने के बाद शाम को वे मुझे गंगा आरती दिखाने के लिए घाट पर ले गए। मुझे वहाँ का हर दृश्य बहुत ही मनोरम लग रहा था और कोतुहलवश मैं सब घूर-घूर कर देख रहा था। दूसरे दिन मैं डैड के साथ बीएचयू के रिसेप्शन के पास खड़ा था जहाँ डैड रिसेप्शन पर कुछ पूछ रहे थे शायद पास्ट का रिफरेन्स देते हुए माँ के बारे में पूछ रहे होंगे। पता नहीं उन्हें क्यों लगा कि माँ उन्हें अब भी बीएचयू में ही मिलेंगी। पर कहीं से शुरुआत करनी ही थी तो जहाँ छोड़ कर गए थे वहीं से शुरुआत करना ज्यादा सही लगा उन्हें। रिसेप्शन पर शायद हमें सिटींग एरिया में वेट करने के लिए कहा गया और थोड़ी देर में वहाँ का कोई स्टाफ हमारे लिए पानी और और फिर थोड़ी देर बाद कॉफी सर्व कर गया। थोड़ी देर में लगभग तीस मिनट के बाद एक खूबसूरत सी महिला नेवी ब्लू सिल्क साड़ी और खुले बालों में मांग में सिंदूर भरे हुए और एक हाथ में कड़ा और दूसरे में घडी पहन रखी थी, सधे हुए क़दमों से हमारी ओर ही आ रही थी। उनके चेहरे पर एक अलग ही तेज़ और आत्मविश्वास झलक रहा था। उन्होंने एक हाथ में डायरी ले रखी थी।  उन्हें देखते ही डैड खड़े हो गए और लगभग पलके झपकाना ही भूल गए थे।
{केविन (एड़ी के डैड) को हिंदी बोलनी नहीं आती थी पर वो हिंदी समझ पाता था। इसलिए केविन इंग्लिश में बात कर रहा था और सुकन्या उसके सवालों का जवाब कभी हिंदी तो कभी इंग्लिश में दे रही थी। आगे केविन और सुकन्या के इंग्लिश कन्वर्सेशन को हिंदी में लिखा गया है।}
'यू स्टिल लुक यंग एंड ब्यूटीफुल' अचानक ही उनके मुँह से निकल गया।
'यू आर आल्सो लुकिंग हैंडसम ओनली स्माइल इस मिसिंग ऑन योर फेस। व्हाट हैपन केविन?'
डैड कुछ कहते, उससे पहले ही उन्होंने (सुकन्या माँ) अपने चारों ओर देखा और कहा- 'लेटस गो टू अ प्लेस। प्लीज फॉलो मी। (चलो कहीं चलते हैं। मेरे पीछे आओ।)' और ये कहते हुए वो आगे बढ़ गयीं।
डैड के पास सवाल करने का कोई राइट नहीं था तो उन्होंने भी बिना बहस के उन्हें फॉलो करना ही सही समझा। वो मेरा हाथ पकड़ कर उनके पीछे-पीछे चलने लगे। थोड़ी देर बाद ही हम लोग बीएचयू के कैम्पस में ही बने एक स्टाफ क्वार्टर में थे शायद सुकन्या माँ यहीं रहती थीं। उन्होंने हमें सोफे पर बैठने को कहा और फिर किचन की ओर चली गयीं। थोड़ी देर बाद वो एक ट्रे में कॉफ़ी और सैंडविच लिए हुए हमारे पास आयीं। डैड ने कुछ बोलने के लिए मुँह खोला ही था कि माँ बोल पड़ीं- 'प्लीज हेव थिस फर्स्ट। आफ्टर दैट, वी विल टॉक।' डैड के पास फिर से उनकी बात मानने के अलावा कोई रास्ता न था। फिर उन्होंने और मैंने ब्रेकफास्ट किया पर डैड के चेहरे पर बेचैनी और अनगिनत सवाल साफ दिखाई दे रहे थे जोकि सुकन्या माँ ने भी उनको देखते ही महसूस होने लगे थे। मैं ज्यादा बड़ा तो नहीं था पर थोड़ा-थोड़ा सब समझने की कोशिश कर रहा था। मेरे सामने खड़ी वो महिला मेरे लिए अनजान ही थी तो मैं कभी आश्चर्य से उन्हें देखता और कभी अपने सैंडविच खाने पर फोकस करता।
जब हमने ब्रेकफास्ट फिनिश कर लिया तब सारी प्लेटस उठाकर माँ किचेन सिंक में रखकर फिर हमारे पास आकर पास वाले सोफे पर बैठ गयीं और उन्होंने कहा- 'हाँ तो हम कहाँ थे? आई मीन, आई हेड सेड दैट-'यू आर आल्सो लुकिंग हैंडसम ओनली स्माइल इस मिसिंग ऑन योर फेस। व्हाट हैपन केविन? आई हेड टोल्ड यू टू डू केयर ऑफ माय हस्बैंड। देन वेयर इस हिज स्माइल?.. हम्म?''
(डैड आश्चर्य से माँ को देखने लगे)
'ऐसे क्या देख रहे हो केविन?'
डैड (अटकते हुए) 'क्या.. क्या कहा तुमने जस्ट अभी?'
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---(Copyright@भावना मौर्य "तरंगिणी")---

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